

Pune Mundhwa Land Scam Parth Pawar: पुणे के 300 करोड़ रुपये के बहुचर्चित मुंढवा जमीन सौदे में एनसीपी के नेता और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट की लगातार कड़ी टिप्पणियों के बाद महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सदानंद दाते ने मामले की 'अधिक पेशेवर और विस्तृत जांच' के आदेश दिए हैं। पुणे पुलिस आयुक्त को सभी नामजद।
आरोपियों के साथ अन्य संदिग्धों की भी व्यापक जांच करने और हर सप्ताह जांच की प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। मामले में सबसे बड़ा सवाल पार्थ पवार की 99 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर है। जिस अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी ने मुंढवा की 40 एकड़ जमीन खरीदी, उसमें पार्थ पवार की 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है,
जबकि सह-आरोपी दिग्विजय पाटिल की हिस्सेदारी महज 1 प्रतिशत है। इसके बावजूद पुलिस की चार्जशीट में पाटिल को आरोपी बनाया गया, जबकि पार्थ पवार आरोपी नहीं हैं। इसी विरोधाभास पर हाई कोर्ट ने पुलिस और राज्य सरकार से सवाल किए।
1 अक्टूबर को न्यायमूर्ति माधव जे. जामदार ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि जांच अधिकारी के अनुसार 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है, जबकि 1 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। अदालत ने पूछा कि क्या 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले पार्थ पवार इस सौदे के लाभार्थी नहीं है?
मामला पुणे शहर के मुढवा की करीब 40 एकड़ महार वतन जमीन से जुड़ा है। एफआईआर के अनुसार यह जमीन भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के पास लीज पर थी और मई 2025 में आवश्यक सरकारी मंजूरी के बिना अमेडिया एंटरप्राइजेज को करीब 300 करोड़ रुपये में बेच दी गई। जमीन की कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये बताई गई है।
यह मामला पुणे के मुंढवा की करीब 40 एकड़ महार वतन जमीन से जुड़ा है। एफआईआर के अनुसार, जमीन भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के पास लीज पर थी। आरोप है कि मई 2025 में आवश्यक सरकारी मंजूरी के बिना इसे अमेडिया एंटरप्राइजेज को करीब 300 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
बताया गया है कि इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये थी। अब डीजीपी के निर्देश के बाद पुलिस सभी संबंधित व्यक्तियों और संदिग्धों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।