

पुणे के लोकमान्य नगर में 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन।
पुणे लोकमान्य फेस्टिवल का 29वां आयोजन, आतिशबाजी देखने उमड़ी भीड़।
मिलावट, पानी की किल्लत, यातायात और सूखे जैसी समस्याओं के खिलाफ जागरूकता का संदेश।
Pune Ravan Dahan on Social Issues: बुराई पर अच्छाई की जीत और समाज में व्याप्त समस्याओं के खिलाफ जागरूकता का संदेश देते हुए पुणे के लोकमान्य नगर में 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। पुणे लोकमान्य फेस्टिवल की ओर से आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों और बच्चों ने हिस्सा लिया। फेस्टिवल का यह 29वां वर्ष था। इस बार रावण दहन के जरिए खाद्य पदार्थों में मिलावट, पानी की किल्लत, बदहाल यातायात व्यवस्था, सूखे के संकट और समाज में मौजूद बुरी प्रवृत्तियों के अंत का प्रतीकात्मक संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत आकर्षक आतिशबाजी के साथ हुई। इसके बाद 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। रंग-बिरंगी आतिशबाजी और रावण दहन देखने के लिए आयोजन स्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ी। बच्चों में भी समारोह को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। पूरे परिसर में उत्सव का माहौल रहा।
आयोजकों ने रावण दहन को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया। खाद्य पदार्थों में मिलावट, पानी की कमी, यातायात की परेशानी और सूखे जैसी चुनौतियों को प्रतीकात्मक रूप से बुराइयों के तौर पर पेश किया गया।
पुणे लोकमान्य फेस्टिवल के संस्थापक-अध्यक्ष एडवोकेट गणेश सातपुते और उत्सव अध्यक्ष नरेश मित्तल ने कार्यक्रम की जानकारी दी। एडवोकेट गणेश सातपुते ने कहा, “रावण दहन केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह समाज में व्याप्त बुरी प्रवृत्तियों के नाश का संदेश देने वाला आयोजन है। आज पानी की किल्लत, यातायात की समस्या, सूखा, खाद्य पदार्थों में मिलावट और विभिन्न अनिष्ट प्रवृत्तियां समाज के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।”
उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट से नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा होता है। ऐसे गैरकानूनी कृत्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। इन समस्याओं पर काबू पाने के लिए जनजागृति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होनी चाहिए।
गणेश सातपुते ने कहा कि पुणे लोकमान्य फेस्टिवल पिछले 29 वर्षों से सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखते हुए सामाजिक समस्याओं को उजागर करने और लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए त्योहारों की परंपरा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने और नागरिकों को समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक कदम उठाने का संदेश देने की कोशिश की जाती है।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट