Kamla Nehru Hospital में चार दिन तक नहीं उठा कचरा, मरीजों की सेहत पर मंडराया खतरा

Pune Kamla Nehru Hospital Garbage Crisis: कमला नेहरू अस्पताल में चार दिनों तक कचरा नहीं उठने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई। दुर्गंध और संक्रमण के खतरे के बीच आयुक्त के निर्देश पर सफाई अभियान चलाया गया।
Pune Kamla Nehru Hospital Garbage Crisis
कमला नेहरू अस्पताल (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune Kamla Nehru Hospital Garbage Crisis: पुणे मनपा (पीएमसी) द्वारा संचालित मंगलवार पेठ स्थित कमला नेहरू अस्पताल में पिछले चार दिनों से कचरा न उठाए जाने के कारण गंभीर स्थिति पैदा हो गई। अस्पताल परिसर में भारी मात्रा में गीला और सूखा कचरा जमा होने से चारों तरफ तेज दुर्गंध फैल गई।

इससे अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों, उनके परिजनों और - वहां तैनात कर्मचारियों के 5 किया है कि इस कचरे में कोई भी स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडराने लगा। आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कचरों की सफाई पर ध्यान दिया। राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने साफ खतरनाक बायो-मेडिकल वेस्ट (चिकित्सीय अपशिष्ट) शामिल नहीं था।

कचरा वाहन नहीं आ रहा था

कमला नेहरू अस्पताल में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। पिछले चार दिनों से मनपा के घनकचरा विभाग की गाड़ियां अस्पताल से कचरा उठाने नहीं पहुंची थीं।

नतीजा यह हुआ कि कचरे के ढेर से निकलने वाला गंदा और दूषित तरल पदार्थ (लीचेट) अस्पताल परिसर में बहने लगा, जिससे संक्रमण (इन्फेक्शन) फैलने की आशंका अत्यधिक बढ़ गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने संबंधित विभाग से कई बार संपर्क किया और वाहन भेजने की गुहार लगाई, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

अस्पताल में जमा कचरा सामान्य गीला और सूखा कचरा था, न कि बायो-मेडिकल वेस्ट घनकचरा विभाग की गाड़ी खराब होने के कारण पिछले दो दिनों से कचरा नहीं उठाया जा सका था। अस्पताल में नियमित रूप से वाहन भेजने के लिए घनकचरा विभाग के उपायुक्त को पत्र भी भेजा गया है।

-डॉ नीना बौराई, स्वास्थ्य प्रमुख, पुणे मनपा

आयुक्त के निर्देश पर आधे घंटे में एक्शन

जब स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तो मामले की शिकायत सीधे मनपा आयुक्त नवल किशोर राम तक पहुंचाई गई। शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयुक्त ने तत्काल स्वास्थ्य और घनकचरा विभाग के आला अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। आयुक्त के हस्तक्षेप के महज आधे घंटे के भीतर कचरा उठाने वाली गाड़ियां अस्पताल परिसर पहुंचीं और युद्धस्तर पर काम करके पूरे परिसर को साफ किया गया।

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