

Pune PMC Spent 32 Crore News: पुणे मनपा (पीएमसी) में विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कामकाज के लिए बाहरी सलाहकार संस्थाओं पर बढ़ती निर्भरता अब विवाद का विषय बनती जा रही है।
मनपा में अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और विशेषज्ञ कर्मचारियों का मजबूत तंत्र मौजूद होने के बावजूद विभिन्न विभागों द्वारा लगातार निजी सलाहकारों की नियुक्ति किए जाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं।
आम सभा में प्रस्तुत प्रश्नोत्तर पुस्तिका से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक बाहरी सलाहकार संस्थाओं और विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया, जिन पर अब तक 32 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
विपक्ष नेता अधिवक्ता निलेश निकम ने पिछले 15 वर्षों में नियुक्त किए गए सलाहकारों और उन्हें दिए गए मानधन का ब्यौरा मांगा था। प्रशासन की ओर से दिए गए जवाब में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जानकारी के अनुसार मनपा के प्रमुख विभागों ने परियोजना नियोजन, तकनीकी सलाह, निगरानी और प्रबंधन के लिए बड़े पैमाने पर बाहरी एजेंसियों की सेवाएं ली हैं।
सबसे अधिक खर्च नदी पुनरुद्धार परियोजना में किया गया। इस परियोजना के लिए एक सलाहकार संस्था को लगभग 12 करोड़ 11 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि दूसरी संस्था को 4 करोड़ 45 लाख रुपये दिए गए। केवल दो सलाहकार संस्थाओं पर ही 16 करोड़ 56 लाख रुपये खर्च होने से प्रशासनिक खर्च को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
जलापूर्ति विभाग भी सलाहकारों पर भारी खर्च करने वाले विभागों में शामिल है। विभाग ने एक सरकारी सलाहकार संस्था को 6 करोड़ 14 लाख रुपये तथा दूसरी संस्था को 3 करोड़ 59 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा, मलनिस्सारण और परियोजना प्रबंधन से जुड़े कार्यों के लिए करीब 58 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए। जल वितरण व्यवस्था, तकनीकी नियोजन और परियोजना समन्वय जैसे कार्य बाहरी विशेषज्ञों को सौंपे गए।
स्वास्थ्य विभाग ने भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी वैद्यकीय महाविद्यालय और अस्पताल परियोजना के लिए सलाहकारों पर 4 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च किए। अस्पताल भवन, छात्रावास निर्माण, तकनीकी मंजूरी और परियोजना नियोजन जैसे कायों के लिए निजी संस्थाओं की सेवाएं ली गई। वहीं सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग में डिजिटल प्रशासन, वेबसाइट प्रबंधन, ऑनलाइन नागरिक सेवाएं और सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ती दिखाई दे रही है।
घनकचरा व्यवस्थापन विभाग ने कचरा प्रक्रिया, जैव खनन, हरित ईंधन परियोजनाओं और तृत्तीय पक्ष जांच के लिए कई सलाहकार संस्थाओं की नियुक्त्ति की है। वहीं उद्यान विभाग ने राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय विकास परियोजना के लिए 1 करोड़ 16 लाख का भुगतान किया। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब मनपा के पास अनुभवी अभियंता और विशेषज्ञ अधिकारी मौजूद है, तब लगभग हर बड़े प्रकल्प के लिए बाहरी सलाहकारों की जरूरत क्यों पड़ रही है।
पुणे से नवभारत लाइव के लिए समीर सैयद की रिपोर्ट