मुन्नाभाई MBBS से भी खतरनाक! बिना डिग्री 1 साल से चला रहा था क्लीनिक, पुणे में नकली डॉक्टर का भंडाफोड़

Fake Doctor In Pune Kharadi: पुणे में बिना मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन के 1 साल से क्लीनिक चला रहे फर्जी डॉक्टर धीरज येवले का पर्दाफाश। लेडी डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन चुराकर किया बड़ा फर्जीवाड़ा।
pune fake doctor dheeraj yewale exposed kharadi polyclinic
फेक डॉक्टर की सांकेतिक फोटो(सोर्स: एआई फोटो)
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Pune Fake Doctor Case: पुणे से एक ऐसा सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने फिल्मी 'मुन्नाभाई' की कहानी को भी पीछे छोड़ दिया है। BAMS की पढ़ाई अधूरी होने के बावजूद खुद के नाम के आगे 'डॉक्टर' की पदवी लगाकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक युवक का PMC के स्वास्थ्य विभाग ने पर्दाफाश किया है।

यह फर्जी डॉक्टर पिछले एक साल से पुणे के खराडी इलाके में धड़ल्ले से अपना क्लीनिक चला रहा था और उसने एक महिला डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन नंबर का अनधिकृत इस्तेमाल कर एक नामी अस्पताल में नौकरी भी हासिल कर ली थी। चंदननगर पुलिस ने इस मामले में जलगांव जिले के चालीसगांव निवासी 29 वर्षीय आरोपी धीरज दिलीप येवले के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

खराडी के श्री विघ्नहर्ता पॉलिक्लिनिक पर छापा

पुणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि खराडी में पुराने मुंढवा रोड पर स्थित प्लैटिनम टावर में श्री विघ्नहर्ता पॉलिक्लिनिक नाम से धीरज येवले बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन और मेडिकल डिग्री के डॉक्टरी प्रैक्टिस कर रहा है।

इस सूचना के आधार पर 10 अगस्त 2026 को पुणे नगर निगम के चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोपाल उजवनकर, डॉ. ज्ञानेश्वर चकोर और संतोष जमदाडे के दस्ते ने पॉलिक्लिनिक पर अचानक छापा मारा। छापेमारी के दौरान पाया गया कि आरोपी ने अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखे बोर्ड लगाए थे तथा फर्जी कागजातों और इंटरनेट पर झूठे रिव्यूज के जरिए खुद को मान्यता प्राप्त डॉक्टर के रूप में पेश कर रखा था।

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लेडी डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन नंबर का फर्जीवाड़ा

स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई गहन पूछताछ और जांच में एक और हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ। आरोपी धीरज येवले ने विश्रांतवाड़ी स्थित कस्तुरबा स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टर के पद पर नौकरी पाने के लिए एक मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जमा किया था।

जब अधिकारियों ने उस सर्टिफिकेट पर दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर की काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट पर पड़ताल की, तो पता चला कि वह नंबर धीरज का नहीं, बल्कि डॉ. ऋचा देविदास डिगोले नामक एक महिला डॉक्टर के नाम पर दर्ज है। इस तरह महिला डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन और पहचान का दुरुपयोग करके उसने अस्पताल में मरीजों का इलाज करना शुरू कर दिया था।

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चंदननगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज

जुलाई 2025 से जुलाई 2026 तक यानी पूरे एक साल तक मरीजों को धोखे में रखकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस फर्जी डॉक्टर के खिलाफ पुणे नगर निगम के कानूनी विभाग की राय लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

चंदननगर पुलिस ने आरोपी धीरज येवले के खिलाफ BNS की धारा 318(2) और महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की धारा 33(2) व 36 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बिना किसी वैध मेडिकल अर्हता के एक साल तक चले इस बड़े फर्जीवाड़े से पुणे के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है।

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