पुणे: 865 करोड़ के चांदनी चौक प्रोजेक्ट में पैदल यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे, कब पूरा होगा फुटओवर ब्रिज?

Pune News: पुणे के चांदनी चौक पर NHAI द्वारा बनाए रहे फुटओवर ब्रिज में देरी से लोगों में नाराजगी है। 865 करोड़ के फ्लाईओवर के बावजूद पैदल यात्रियों को जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करना पड़ रहा है।
Pune Foot Over Bridge Delay
फुटओवर ब्रिज (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune Foot Over Bridge Delay: पुणे शहर के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक चांदनी चौक, जिसे 865 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से संवारा गया था, आज पैदल यात्रियों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। मल्टी-लेवल फ्लाईओवर के उद्घाटन के महीनों बाद भी, यहां प्रस्तावित फुटओवर ब्रिज (FOB) का काम कछुआ गति से चल रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष और गुस्सा है।

सिर्फ खंभों तक सिमटा काम

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बनाया जा रहा यह फुटओवर ब्रिज अब तक केवल खंभों के आधार तक ही सीमित है। सात-आठ महीने बीत जाने के बावजूद मुख्य ढांचे का काम शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। यह ब्रिज चांदनी चौक के नए बस स्टॉप से बावधान के ईरानी कैफे तक लगभग 100 मीटर लंबा होना है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर लगता है कि इसे पूरा होने में अभी लंबा समय लगेगा।

जान जोखिम में डालने को मजबूर यात्री

ब्रिज न होने के कारण यात्रियों के पास दो ही विकल्प बचते हैं। या तो वे 2 से 3 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर दूसरी ओर जाएं। या फिर तेज रफ्तार भारी ट्रैफिक के बीच से दौड़कर जान जोखिम में डालते हुए हाईवे पार करें। रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। स्ट्रीट लाइट्स और सुरक्षित पारगमन की कमी का फायदा उठाकर रिक्शा चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक कष्टदायक है।

पुणे मेट्रो की नई घोषणा

इस बीच, पुणे मेट्रो ने भी चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन के पास 508 मीटर लंबा एक अलग फुट ओवरब्रिज बनाने की घोषणा की है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि जब तक मौजूदा NHAI प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता, तब तक ये घोषणाएं केवल कागजी आश्वासन ही लगती हैं।

प्रशासन को यह समझना होगा कि करोड़ों के कंक्रीट के ढांचे तब तक अधूरे हैं, जब तक कि वे आम आदमी के लिए सुरक्षित न हों। क्या NHAI और स्थानीय प्रशासन इस सुस्ती को त्यागकर जनहित में काम तेज करेगा? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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