FDA की जांच में बड़ा खुलासा: PMC अस्पतालों में कागज पर बांटी जा रही मलहम, घर की बोतलों में सिरप
Pune PMC News: पुणे मनपा के कमला नेहरू अस्पताल और पोटे क्लीनिक में FDA की जांच में खुली पोल। मरीजों को घर से खाली बोतल लाने और कागज पर मलहम देने की असुरक्षित व्यवस्था बंद।
- Written By: रूपम सिंह
पुणे अस्पताल ,(सोर्स-सोशल मीडिया)
Pune PMC Hospital Medicine Irregularities: पुणे मनपा (पीएमसी) द्वारा संचालित अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली कार्यप्रणाली सामने आई है। अन्न व औषध प्रशासन (एफडीए) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में यह खुलासा हुआ है कि मनपा के अस्पतालों में आने वाले मरीजों को कफ सिरप (खांसी की दवा) लेने के लिए अपने घर से खाली बोतलें लाने को कहा जा रहा है।
इसके साथ ही, त्वचा रोगों के लिए दी जाने वाली औषधीय मलहम (ऑइंटमेंट) को कंटेनर या डिब्बी के बजाय साधारण कागज के टुकड़ों पर रखकर वितरित किया जा रहा है। एफडीए ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद असुरक्षित, अमानक और संक्रामक बीमारियों को बढ़ावा देने वाला माना है। दवाओं के इस प्रकार असुरक्षित वितरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए एफडीए ने मनपा के स्वास्थ्य विभाग को तत्काल प्रभाव से व्यवस्था में सुधार करने और सुरक्षित दवा वितरण प्रणाली लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
एफडीए की टीम ने हाल ही में सहकारनगर स्थित शिवशंकर पोटे क्लीनिक और मंगलवार पेठ इलाके में स्थित कमला नेहरू अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था।
इस जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि मरीजों को सिरप देने के लिए अस्पताल प्रशासन के पास उचित व्यवस्था नहीं थी और वे मरीजों से ही बोतलें मंगवा रहे थे।
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संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है…
एफडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि मरीजों द्वारा घर से लाई गई बोतलों की स्वच्छता और उनके कीटाणुरहित होने की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसी बोतलों में दवा भरकर देने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे मरीज ठीक होने के बजाय और अधिक बीमार पड़ सकता है। इसी तरह, खुली हवा में मलहम को कागज पर रखकर देने से उसकी औषधीय क्षमता नष्ट होती है और उसमें धूल-मिट्टी व बैक्टीरिया मिलने की पूरी संभावना रहती है।
स्वास्थ्य विभाग बैकफुट पर
इस निरीक्षण के बाद एफडीए ने मनपा को स्पष्ट आदेश दिया है कि भविष्य में कफ सिरप और मलहम का वितरण पूरी तरह से स्वच्छ, सीलबंद बोतलों और उचित कंटेनरों के जरिए ही किया जाए। इस प्रशासनिक निर्देश के बाद पुणे मनपा का स्वास्थ्य विभाग बैकफुट पर आ गया है।
पुणे मनपा के केंद्रीय औषधि भंडार विभाग ने अब इन अस्पतालों के लिए आवश्यक पैकेजिंग सामग्री, खाली सैनिटाइज्ड बोतलें और छोटी प्लास्टिक की डिब्बियां (कंटेनर) उपलब्ध कराने की कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए मनपा के प्रभारी चिकित्सा प्रशासनिक अधिकारी डॉ। सुनील आंधले ने कहा कि एफडीए की इस जांच में किसी भी अस्पताल में कोई एक्सपायर्ड दवा या अन्य कोई बड़ी वित्तीय या तकनीकी अनियमितता नहीं पाई गई है।
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पहले भी आ चुके हैं कई मामले
यह पहली बार नहीं है जब पुणे मनपा के स्वास्थ्य विभाग की इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले भी कई बार मनपा के अस्पतालों में दवाओं के रखरखाव और वितरण को लेकर बड़े सवाल खड़े होते रहे हैं।
पिछले वर्षों में भी कमला नेहरू अस्पताल सहित मनपा के कुछ अन्य प्रसूति गृहों में जीवन रक्षक दवाओं को उचित तापमान (कोल्ड चेन) में न रखने और रेफ्रिजरेटर खराब होने के कारण दवाएं खराब होने की रिपोर्ट एफडीए को मिली थी।
इसके अलावा, दवाओं के स्टॉक का सही ऑडिट न होने और कुछ दवाखानों में बुनियादी स्वच्छता के अभाव के चलते मरीजों को दूषित माहौल में दवाएं वितरित करने के मामले भी एफडीए की जांच के घेरे में आ चुके हैं।
