पुणे मनपा की 5 अंग्रेजी स्कूलें 9 साल के लिए आकांक्षा फाउंडेशन को सौंपी जाएंगी, विपक्ष का जोरदार विरोध

Pune Education News: पुणे मनपा की 5 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को 9 साल के लिए पीपीपी मॉडल पर आकांक्षा फाउंडेशन को सौंपा गया। विपक्ष के भारी विरोध के बीच भाजपा ने प्रस्ताव पास कराया।
PMC approves proposal to hand over 5 English medium schools to Akanksha Foundation on a PPP model for 9 years, despite stiff opposition from Congress and NCP.
पुणे स्कूल (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune Municipal Corporation: पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) की पांच अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत आगामी नौ वर्षों के लिए आकांक्षा फाउंडेशन को सौंपने के प्रस्ताव को सोमवार को हुई जनरल बॉडी की बैठक में मंजूरी दे दी गई। भारतीय जनता पार्टी ने अपने बहुमत के बल पर विपक्ष के तीव्र विरोध के बावजूद इस प्रस्ताव को पारित कराया। इस फैसले के साथ अब इन स्कूलों के संचालन और शैक्षणिक प्रबंधन की जिम्मेदारी आकांक्षा फाउंडेशन के पास होगी।

इस प्रस्ताव पर पहले स्थायी समिति में चर्चा हुई थी, जहां करार की अवधि को नौ वर्ष से घटाकर तीन वर्ष करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, जनरल बॉडी की बैठक में मूल प्रस्ताव को ही मंजूरी देते हुए नौ वर्ष की अवधि पर अंतिम मुहर लगा दी गई। मनपा प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, आधुनिक शिक्षण पद्धतियां लागू करना और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

निर्णय के अनुसार, मनपा प्रशासन आकांक्षा फाउंडेशन को प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष 25 हजार रुपये का अनुदान देगा। इन पांच स्कूलों में वर्तमान में लगभग 4,500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अनुमान है कि अगले नौ वर्षों में इस परियोजना पर करीब 101 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रशासन का दावा है कि इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।

हालांकि, इस फैसले का कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शरद पवार गुट के नगरसेवकों ने कड़ा विरोध किया। नगरसेवक अरविंद शिंदे ने कहा कि मनपा की स्कूलें आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच की तरह हैं। ऐसे में इन्हें निजी संस्था के हवाले करना सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम साबित हो सकता है।

विपक्ष के गटनेता रामचंद्र कदम ने भी प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि पहले अस्पतालों और पीएमपी जैसी सेवाओं को पीपीपी मॉडल पर देने से नागरिकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले के प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं रहे, तो शिक्षा क्षेत्र में इसी मॉडल को लागू करने की क्या आवश्यकता है।

वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता गणेश बिडकर ने विपक्ष की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह स्कूलों का निजीकरण नहीं, बल्कि उनके आधुनिकीकरण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, इस पहल से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिलेगा, जिससे मनपा स्कूलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

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