Pimpri Chinchwad में चार से ज्यादा मजबूत उम्मीदवार, सत्ता का रास्ता हुआ कठिन
Maharashtra: पिंपरी-चिंचवड मनपा चुनाव में इस बार मुकाबला सीधा नहीं, बल्कि बहुकोणीय हो गया है।कई प्रभागों में मजबूत बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी से वोटों के बंटवारे और ‘किंगमेकर’ की भूमिका अहम हो गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Local Body Election: आगामी पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका चुनाव में इसबार मुकाबला द्विध्रुवीय न होकर पूरी तरह बहुकोणीय हो चुका है।
शहर की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है।
हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट, मनसे और कांग्रेस की सक्रियता ने समीकरणों को पेचीदा बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं है, बल्कि भविष्य की शहरी राजनीति का आधार भी तय करेगा, शहर के कई प्रभागों में चार से अधिक मजबूत उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण ‘किंगमेकर’ की भूमिका अहम हो गई है।
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वोटों के बंटवारे की संभावना अधिक
जहां भाजपा और शिंदे सेना अपने संगठनात्मक कौशल पर भरोसा कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों घड़े अपने पारंपरिक गढ़ बचाने की जद्दोजहद में हैं, कई प्रभागों में निर्दलीय उम्मीदवारों और बागियों की एंट्री ने बड़े दली की नींद उड़ा दी है।
इस मतों के बटवारे का सौधा फायदा या नुकसान किसे होगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है। इस बार मतदाता केवल पार्टी के नाम पर नाही, बल्कि स्थानीय मुद्दों पर वोट देने के मूड में दिखा रहे है। शहर मैं पानी की किल्लत, यातायात जाम, कचरा प्रबंधन और औद्योगिक क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं मुख्य चुनावी मुद्दे बनकर उभरे है।
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टिकट वितरण से उपजे असंतोष के बीच, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पिंपरी-विचयत की जनता विकास के दावों पर भरोसा करती है या नए चेहरों को मौका देती है। चुनाव परिणाम यह स्पष्ट कर देंगे कि औद्योगिक नगरी की कमान किसके हाथों में सुरक्षित है।
