सुनेत्रा पवार की भूमिका पर टिकी नजरें! क्या पिंपरी-चिंचवड़ में एनसीपी को मिलेगा विधान परिषद का 'बूस्टर डोज'?

Pimpri Chinchwad MLC Election: पिंपरी-चिंचवड़ विधान परिषद चुनाव में एनसीपी के विलास लांडे और योगेश बहल के बीच प्रतिष्ठा की जंग। सुनेत्रा पवार की भूमिका अहम।
Sunetra Pawar MLC Election 2026
Sunetra Pawar MLC Election 2026 (फोटो क्रेडिट-X)
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Sunetra Pawar MLC Election 2026: पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ की राजनीति में आगामी विधान परिषद (MLC) चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। वर्तमान में शहर के राजनीतिक परिदृश्य पर भाजपा का दबदबा है, जहाँ उसके पास चार विधायक हैं। इसके विपरीत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पास केवल एक विधायक है। इस राजनीतिक असंतुलन को पाटने और विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए एनसीपी नेतृत्व अब विधान परिषद की खाली सीट पर पिंपरी-चिंचवाड़ के किसी कद्दावर चेहरे को मौका देने पर विचार कर रहा है।

इस रेस में पार्टी के भीतर सुनेत्रा पवार की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस सीट का उपयोग पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए एक 'बूस्टर डोज' के रूप में करेगा, विशेषकर भोसारी और चिंचवड़ क्षेत्रों में जहाँ भाजपा की पकड़ काफी मजबूत है।

विलास लांडे बनाम योगेश बहल: अनुभव और संगठन की जंग

फिलहाल एनसीपी से चार प्रमुख नाम चर्चा में हैं, लेकिन असली मुकाबला पूर्व विधायक विलास लांडे और नगर अध्यक्ष योगेश बहल के बीच माना जा रहा है। विलास लांडे भोसारी के पहले विधायक रह चुके हैं और उनका जनसंपर्क काफी गहरा है। उनके समर्थकों का दावा है कि शहर में एनसीपी की खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लांडे का अनुभव अपरिहार्य है।

हल के समर्थकों की मांग

दूसरी ओर, योगेश बहल वर्तमान में नगर अध्यक्ष हैं और नगर निगम की राजनीति में उनका व्यापक अनुभव रहा है। पार्टी संगठन पर उनकी पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है। बहल के समर्थकों की मांग है कि नगर अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यों को पहचान मिलनी चाहिए और उन्हें विधान परिषद भेजा जाना चाहिए।

गावन्हे और नाना काटे भी रेस में शामिल

इन दो वरिष्ठ नेताओं के अलावा, आक्रामक नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व पार्षद अजीत गावन्हे और चिंचवाड़ उपचुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाले नाना काटे के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी के सामने चुनौती यह है कि किसे मौका दिया जाए जिससे शहर का राजनीतिक संतुलन बना रहे और आगामी चुनावों में भाजपा के 'प्रभुत्व' को प्रभावी ढंग से चुनौती दी जा सके। अब सबकी निगाहें सुनेत्रा पवार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे भोसारी और चिंचवड़ के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए किसकी 'माला' गले में डालते हैं।

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