पुणे के निरामया हॉस्पिटल पर बड़ा एक्शन, 86 करोड़ बकाया पर LIC ने बिल्डिंग सील की, जानें पूरी जानकारी

Pune Niramaya Hospital: पिंपरी चिंचवड़ के निरामया हॉस्पिटल पर LIC फाइनेंस ने 86 करोड़ का कर्ज न चुकाने पर सरफेसी एक्ट के तहत 'इमारत-अ' का कब्जा ले लिया है। 30 दिन में भुगतान न होने पर नीलामी होगी।
LIC Housing Finance Seizes Hospital
LIC हाउसिंग फाइनेंसप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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LIC Housing Finance Seizes Hospital: पुणे जिले के पिंपरी चिंचवड़ स्थित निरामया हॉस्पिटल पर बकाया भारी कर्ज को लेकर एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने बड़ी कार्रवाई की है।

बार-बार नोटिस के बावजूद बकाया रकम का भुगतान नहीं होने पर वित्तीय संस्था ने सरफेसी कानून के तहत हॉस्पिटल परिसर की 'इमारत-अ' का प्रत्यक्ष कब्जा ले लिया है।

संस्था के अनुसार संबंधित कर्जदारों और गारंटरों पर 86 करोड़ 35 लाख 65 हजार 754 रुपये और इसके अलावा लागू व्याज की राशि बकाया है। अब 30 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान नहीं होने पर संपत्ति को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

LIC हाउसिंग फाइनेंस की ओर से 2023 में जारी हुआ था नोटिस

LIC हाउसिंग फाइनेंस के अधिकृत अधिकारी की ओर से जारी सूचना के अनुसार, सरफेसी अधिनियम, 2002 की धारा 13(2) के तहत 8 नवंबर 2023 को नोटिस जारी किया गया था।

पुणे जिले के पिंपरी चिंचवड़ स्थित निरामया हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड सहित संबंधित कर्जदारों और गारंटरों को बकाया रकम चुकाने के लिए 60 दिनों की मोहलत दी गई थी। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर वित्तीय संस्था ने संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई आगे बढ़ाई।

मामले में प्रमोद केशव जोशी, संजीव राजाराम गंभीर, राजेंद्र सदाशिव राबडे, अजित महेंद्र यादव, प्रमोद सी। सरनोत, नंदकुमार कांतीलाल पाटील, दिलीप शांताराम कामत, किशोर तुलसीदास पाहुजा, यशवंत लक्ष्मण नानेकर, श्रीरंग सदाशिव गोखले और दीपक विष्णु सालुंखे सहित संबंधित कर्जदारों और गारंटरों को नोटिस जारी की गई थी।

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खरीद-बिक्री से बचने की दी गई चेतावनी

पुणे जिले के पिंपरी चिंचवड़ स्थित निरामया हॉस्पिटल पर वित्तीय संस्था ने आम नागरिकों को इस संपत्ति के संबंध में किसी भी तरह का आर्थिक लेन-देन या खरीद-बिक्री नहीं करने की चेतावनी दी है। संस्था के अनुसार, ऐसा कोई भी व्यवहार बकाया कर्ज और उस पर लागू कानूनी दायित्वों के अधीन रहेगा।

साथ ही 30 दिनों की बिक्री नोटिस जारी कर स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में ब्याज सहित पूरी बकाया राशि जमा नहीं होने पर सरफेसी कानून के तहत संपत्ति की बिक्री यानी नीलामी की कार्रवाई की जाएगी।

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