

Khed Sahakar Politics: पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (PDCC) के आगामी पंचवर्षीय चुनाव की घोषणा होते ही खेड़ तहसील का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। क्षेत्र के सहकारिता क्षेत्र पर अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए पूर्व विधायक दिलीप मोहिते पाटील और वर्तमान विधायक बाबाजी काले के गुटों के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई देखने को मिल रही है। प्राथमिक सहकारी संस्थाओं से मतदाता प्रतिनिधियों के चयन की अंतिम तिथि 24 सितंबर तय की गई है, जिसके चलते गांवों में राजनीतिक बैठकें और चुनावी समीकरण बैठाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
पिछले दो पंचवर्षीय कार्यकाल से PDCC बैंक में खेड़ तहसील का प्रतिनिधित्व पूर्व विधायक दिलीप मोहिते पाटील करते आ रहे हैं। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव में बाबाजी काले से मिली हार के बाद मोहिते पाटील के लिए अपनी राजनीतिक साख और बैंक की कुर्सी बचाना आसान नहीं दिख रहा है। बाबाजी काले के नेतृत्व में सर्वदलीय गठबंधन मोहिते पाटील को घेरने की योजना बना रहा है। यदि विधानसभा चुनाव वाली विपक्षी एकजुटता इस बैंक चुनाव में भी कायम रहती है, तो मोहिते पाटील के लिए यह राह बेहद कठिन साबित होगी।
विपक्ष की ओर से यह चर्चा तेज है कि क्या विधायक बाबाजी काले खुद दिलीप मोहिते पाटील के खिलाफ मैदान में उतरेंगे या अपने गुट से किसी नए चेहरे को मौका देंगे। काले गुट से जिला परिषद के पूर्व गुट नेता डॉ. विजयसिंह शिंदे समेत कई प्रमुख सहकार नेताओं के नाम चर्चा में हैं। खेड़ तहसील में पूर्व विधायक स्व. साहेबराव सातकर, स्व. नारायणराव पवार और स्व. बालासाहेब शेटे जैसे दिग्गजों ने इस पद का नेतृत्व किया है, जिससे यह चुनाव और भी अहम हो जाता है।
खेड़ तहसील में कुल 104 प्राथमिक सहकारी संस्थाएं (ग्रुप-ए), 3 मतदाता (ग्रुप-बी), 55 मतदाता (ग्रुप-सी) और 134 मतदाता (ग्रुप-डी) पंजीकृत हैं। संचालक पद के प्रत्यक्ष चुनाव से पहले इन संस्थाओं से चुने जाने वाले प्रतिनिधियों का रुझान किस गुट की ओर रहता है, वही PDCC बैंक में खेड़ तहसील की भावी सत्ता का फैसला तय करेगा।