पिंपरी मनपा और सोसायटियों में बढ़ा टकराव, STP विवाद में पानी काटने की चेतावनी का हाउसिंग फेडरेशन द्वारा विरोध
Pimpri Chinchwad News: पिंपरी-चिंचवड़ में घटिया एसटीपी के चलते सोसायटियों का पानी काटने के मनपा के फैसले का चिखली-मोशी हाउसिंग फेडरेशन ने विरोध किया है। उन्होंने बिल्डरों पर कार्रवाई की मांग की है।
- Written By: रूपम सिंह
पिंपरी-चिंचवड़ (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Pimpri Chinchwad STP Dispute: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के प्रभावी ढंग से संचालित नहीं होने पर पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (पीसीएमसी) द्वारा हाउसिंग सोसायटियों के पानी का कनेक्शन काटने की चेतावनी का चिखली-मोशी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी फेडरेशन ने कड़ा विरोध किया है। फेडरेशन का कहना है कि बिल्डरों की लापरवाही की सजा निर्दोष रहवासियों को देना पूरी तरह अनुचित है।
‘कार्रवाई बिल्डरों पर हो, नागरिकों पर नहीं’
फेडरेशन के अध्यक्ष संजीवन सांगले ने कहा कि यदि मनपा को कार्रवाई करनी है तो वह नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ करे। उनका आरोप है कि कई बिल्डरों ने निर्माण के दौरान या तो कार्यक्षम एसटीपी स्थापित ही नहीं किए या फिर घटिया गुणवत्ता के संयंत्र लगाकर अधिकारियों की मिलीभगत से पूर्णता प्रमाणपत्र (कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) हासिल कर लिया।
कई सोसायटियों को अब तक नहीं मिला एसटीपी का हस्तांतरण
सांगले के अनुसार, अनेक हाउसिंग सोसायटियों में एसटीपी का कानूनी हस्तांतरण आज तक रहवासियों को नहीं किया गया है। इसके बावजूद पिंपरी-चिंचवड़ मनपा सीधे सोसायटी निवासियों पर कार्रवाई की चेतावनी दे रही है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
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विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
फेडरेशन ने याद दिलाया कि यह मुद्दा पहले महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। उस समय यह मांग की गई थी कि इमारत का हस्तांतरण होने के बाद भी कम से कम पांच वर्षों तक एसटीपी के रखरखाव की कानूनी जिम्मेदारी बिल्डर की ही रहे, ताकि रहवासियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
स्वतंत्र जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग
फेडरेशन ने मांग की है कि प्रत्येक परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। जिन बिल्डरों ने नियमों का उल्लंघन किया है और जिन अधिकारियों ने अनियमितताओं के बावजूद मंजूरी दी, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। फेडरेशन का कहना है कि वास्तविक दोषियों पर सख्त कार्रवाई होने से ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
