पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में 52 करोड़ का घोटाला आरोप; फर्जी बिल, जाली हस्ताक्षरों से ‘तिजोरी पर डाका’!

Pimpri Chinchwad News: PCMC स्थायी समिति अध्यक्ष अभिषेक बारणे ने अकाउंट विभाग पर 52 करोड़ के फर्जी बिल पास करने का आरोप लगाया। मुख्य वित्त अधिकारी प्रवीण जैन को निलंबित करने और जांच की मांग की।
PCMC Standing Committee Chairman alleges a ₹52 crore scam via fake sub-files and forged signatures. Demand for suspension of CFO Pravin Jain as political heat rises in Pimpri.
प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pimpri Chinchwad Financial Scam News:  पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका में एक बड़ा वित्तीय विवाद सामने आया है। स्थायी समिति के अध्यक्ष बारणे ने अकाउंट विभाग पर 'तिजोरी पर डाका' डालने का गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि 24 मई से 31 मार्च के बीच फर्जी उपसंचिकाओं (सब-फाइलों) के माध्यम से करीब 52 करोड़ रुपये के बिल -अभिषेक बारणे, सभापति, स्थायी समिति में दर्ज हैं, उन्होंने भी इन हस्ताक्षरों को जाली बताया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जलापूर्ति, निर्माण और बीआरटी जैसे संबंधित विभागों के प्रमुखों को भी इन बिलों की कोई जानकारी नहीं थी।

में दर्ज हैं, उन्होंने भी इन हस्ताक्षरों को जाली बताया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जलापूर्ति, निर्माण और बीआरटी जैसे संबंधित विभागों के प्रमुखों को भी इन बिलों की कोई जानकारी नहीं थी। अवैध रूप से पास किए गए हैं। आरोप है कि इन बिलों पर भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के कई नगरसेवकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। जिन जनप्रतिनिधियों के नाम इन फाइलों

जैन को निलंबित करें

बारणे ने इस मामले में मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी प्रवीण जैन को मुख्य संदिग्ध बताते हुए उन्हें निलंबित करने और उन पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग आयुक्त से की है। दूसरी ओर, प्रवीण जैन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत पूरी की गई हैं और कार्यों की उपयोगिता रिपोर्ट संबंधित विभागों से प्राप्त हुई थी। उन्होंने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।

पिंपरी-चिंचवड अकाउंट विभाग ने फर्जी दस्तावेजों और नगरसेवकों के जाली हस्ताक्षरों के आधार पर करोड़ों के बिल ठिकाने लगाए हैं। यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की चोरी है। इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

- अभिषेक बारणे, सभापति, स्थायी समिति

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