

PCMC Nominated Corporators Delay: पिंपरी-चिंचवड मनपा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सत्ता आए तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है और इस दौरान दो जनरल बॉडी की बैठकें भी हो चुकी हैं। इसके बावजूद, दस स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति का मामला लगातार लटकाया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विपक्ष को घेरने और उन्हें सत्ता में कोई भी औपचारिक स्थान देने से रोकने के लिए भाजपा जानबूझकर इस प्रक्रिया में देरी कर रही है। आगामी मंगलवार 5 मई को होने वाली स्थगित जनरल बॉडी में भी इन नियुक्तियों के होने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
इस देरी के कारण अब सत्ता पक्ष पर पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पुराने फॉर्मूले को लागू करने का आरोप लग रहा है, जिसे 'कोश्यारी पैटर्न' कहा जा रहा है। महानगरपालिका के चुनाव चार साल के लंबे अंतराल के बाद 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए थे। अगले दिन आए नतीजों में भाजपा ने लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल किया। 6 फरवरी को प्रशासनिक राज समाप्त हुआ और महापौर के रूप में रवि लांडगे तथा उपमहापौर के रूप में शर्मिला बाबर ने पदभार ग्रहण किया। इसके बाद मार्च और अप्रैल में बजट सत्र सहित दो बड़ी सभाएं हुईं, जिनमें स्वीकृत नगरसेवकों का मुद्दा एजेंडे में था, लेकिन हर बार इसे टाल दिया गया।
मनपा में संख्या बल के हिसाब से भाजपा को सात और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस को तीन स्वीकृत नगरसेवक पद मिलने हैं। राकांपा ने अपने तीन उम्मीदवारों के नाम पहले ही सौंप दिए हैं, लेकिन भाजपा में आंतरिक मतभेद और गुटबाजी के कारण उनके कोटे के सात नामों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस देरी के पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि भाजपा नहीं चाहती कि विपक्ष के लोग सदन में सक्रिय हों या सत्ता में किसी भी तरह के नए हिस्सेदार पैदा हों।
इस तरह का घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में तब देखा गया था जब तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महाविकास अघाड़ी सरकार द्वारा अनुशंसित 12 विधान परिषद सदस्यों की सूची को लंबे समय तक रोक कर रखा था।
इसी तुलना के कारण अब स्थानीय स्तर पर इसे कोश्यारी पैटर्न कहा जा रहा है। इस स्थिति ने उन इच्छुक कार्यकर्ताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं जो इस पद के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। सत्ताधारी भाजपा के भीतर स्वीकृत नगरसेवक बनने की होड़ बहुत तीव्र है। वर्तमान में 150 से अधिक लोग इस पद की दौड़ में शामिल है।
जिनमें पूर्व नगरसेवक, चुनाव हार चुके उम्मीदवार, पार्टी पदाधिकारी, बिल्डर और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं। इन लोगों ने विधायकों, पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों और मंत्रियों के जरिए अपनी लॉबिंग तेज कर दी है। कुछ लोगों ने तो सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक अपनी सिफारिश पहुंचाई है, इसके अलावा, भाजपा के भीतर क्षेत्रीय और विचारधारा आधारित गुट सक्रिय है।
शहर में इस बात की भी भारी चर्चा है कि सदन में प्रवेश पाने के लिए कुछ इच्छुक उम्मीदवार एक से पांच करोड़ रुपये तक का चंदा देने की पेशकश कर रहे हैं। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष के नेता प्रशांत शितोले का कहना है कि पार्टी की प्रदेश समिति ने नामों को हरी झंडी दे दी है और आगामी मंगलवार की सभा में पुणे मनपा की तर्ज पर अंतिम समय में सूची जारी की जा सकती है। उन्होंने राकांपा द्वारा दिए गए नामों को बदलने की खबरों को महज अफवाह बताया है। लेकिन तीन महीने की देरी के कारण स्वीकृत नगरसेवकों का कार्यकाल अब छोटा रह गया है।
भाजपा ने पहले ही इन पदों को ढाई-ढाई साल के कार्यकाल में बांटने की घोषणा की थी ताकि अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को मौका मिल सके, लेकिन अब समय की बर्बादी के कारण इस योजना में बदलाव की संभावना है। फिलहाल, सभी की नजरें मंगलवार की सभा पर टिकी हैं।