Pune Water Supply Project: कोंढवा-उंड्री में पानी संकट खत्म होने की उम्मीद, समान जल आपूर्ति योजना का अंतिम चरण

Pune Water Supply Project Update: पुणे के कोंढवा, उंड्री और आसपास के इलाकों में वर्षों से जारी पानी संकट अब खत्म होने वाला है। समान जल आपूर्ति योजना अंतिम चरण में है।
Pune Water Supply Project Relief Plan
जल आपूर्ति योजना (pic credit; social media)
Published on
Updated on

Pune Water Supply Project Relief Plan: पुणे शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित कोंढवा, उंड्री, मोहम्मद वाडी और एनआईबीएम क्षेत्र के नागरिकों को जल्द ही पानी संकट से राहत मिलने वाली है।

पुणे महानगरपालिका की महत्वाकांक्षी समान पानी आपूर्ति योजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है और इन क्षेत्रों के लिए बनाई गई टंकियों में पानी भरने का काम शुरू हो गया है। इस परियोजना से करीब 4 लाख नागरिकों को लाभ मिलेगा।

वर्षों से इन इलाकों में पर्याप्त जलापूर्ति व्यवस्था नहीं होने के कारण नागरिकों को निजी पानी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। कई हाउसिंग सोसायटियां लाखों रुपये टैंकरों पर खर्च कर रही थीं। अब इस योजना के लागू होने से टैंकरों की आवश्यकता कम होगी।

पिछले एक हफ्ते से प्रयास जारी

इस परियोजना के इस चरण को शुरू करने के लिए पिछले एक सप्ताह से जलापूर्ति विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार प्रयासरत थे। मुख्य अभियंता नंदकिशोर जगताप और विनोद क्षीरसागर सहित पूरी टीम बधाई के पात्र है। - पवनीत कौर, अतिरिक्त आयुक्त, पीएमसी

चरणबद्ध रूप से घरों में की जाएगी पानी सप्लाई

पुणे महापालिका के अनुसार, परियोजना के तहत 23 किलोमीटर लंबी मुख्य पानी पाइपलाइन, 17 मिलियन लीटर क्षमता की 8 ऊंची पानी टंकियां और 33 किलोमीटर लंबा नया वितरण नेटवर्क तैयार किया गया है। इसके अलावा 6 जलापूर्ति जोन विकसित किए गए हैं।

इसके जरिए मोहम्मद वाडी, दोराबजी पैराडाइज, कृष्णानगर, कोरिथियंस, जरांडे नगर, उंड्री और कोंढवा क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाएगा। वर्ष 2018-19 में शुरू हुई यह परियोजना करीब 8 वर्षों बाद अब कार्यान्वित हो रही है। 1 मई 2026 को 19 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन शुरू की गई, जिससे दोराबजी पैराडाइज क्षेत्र की 3 टंकियों में पानी भरना शुरू हो गया है।

शेष 4 किलोमीटर पानी पाइपलाइन और 5 अन्य टंकियों को 10 मई 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से घरों तक जलापूर्ति शुरू होगी। इस परियोजना से प्रतिदिन करीब 600 पानी टैंकरों की जरूरत कम होने का अनुमान है। इससे नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ सड़कों पर भारी टैंकरों की आवाजाही भी घटेगी। भूजल दोहन कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी मदद मिलेगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com