

कचरा संकट के चलते हिंजवड़ी समेत 7 गांवों का मनपा में विलय अटका।
मोशी का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट 25 नवंबर से शुरू होने की उम्मीद।
मोशी कचरा डिपो हटाने की मांग पर 5 नवंबर को आंदोलन होगा।
Pimpri Chinchwad Moshi Garbage Depot: मोशी कचरा डिपो में हुए हादसे के बाद पिंपरी-चिंचवड़ शहर की कचरा निस्तारण व्यवस्था पहले से ही दबाव में है। ऐसे में हिंजवड़ी समेत 7 गांवों को महानगरपालिका में शामिल करने की योजना पर फिलहाल ग्रहण लग गया है।
इन गांवों में कचरा संकलन और निस्तारण की व्यवस्था करना मौजूदा परिस्थितियों में संभव नहीं होने की जानकारी मनपा प्रशासन ने जिला प्रशासन को दी है। हालांकि, सात गांवों के विलय को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है। यह जानकारी मनपा आयुक्त डॉ। विजय सूर्यवंशी ने दी।
मोशी कचरा डिपो में सूखे कचरे से बिजली उत्पादन करने वाली परियोजना की चिमनी गिरने के कारण पिछले चार महीनों से बंद है। इसके चलते कचरे के निस्तारण में दिक्कतें आ रही हैं। चिमनी के पुनर्निर्माण में देरी के कारण संबंधित ठेकेदार पर 1 अक्टूबर से प्रतिदिन 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। आयुक्त के अनुसार, यह परियोजना 25 नवंबर से शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद डिपो में अतिरिक्त जगह उपलब्ध होगी।
कचरा समस्या के स्थायी समाधान के लिए शहर में दस स्थानों पर आधुनिक कचरा प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इन केंद्रों के लिए जगह निश्चित कर ली गई है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम शुरू है। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले कुछ कर्मचारियों के परिजनों को संबंधित कंपनी की ओर से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। दिवाली से पहले सहायता राशि देने का आश्वासन आयुक्त ने दिया।
दूसरी कचरे से ऊर्जा बनाने वाली परियोजना के लिए रावेत में एमआईडीसी की 25 एकड़ जमीन राज्य सरकार से मांगी गई है। यहां कचरा जमा करने के बजाय केवल अत्याधुनिक प्रसंस्करण केंद्र बनाया जाएगा। बढ़ती आबादी के मद्देनजर शहर को अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने के लिए पवना बंद पाइपलाइन परियोजना आगे बढ़ाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री के साथ बैठक हो चुकी है। जिला प्रशासन किसानों से चर्चा कर रहा है। वर्ष 2051 तक शहर की जलापूर्ति जरूरतों का आकलन कर अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।
पिछले 40 वर्षों से पूरे पिंपरी-चिंचवड़ शहर का कचरा मोशी डिपो में डाला जा रहा है। डिपो की क्षमता समाप्त होने के बावजूद प्रशासन ने दूसरी जगह कचरा डिपो की व्यवस्था नहीं की। इसके कारण मोशी के नागरिकों को कचरे की समस्या से लगातार जूझना पड़ रहा है। मोशीवासियों ने मांग की है कि शहर के दस क्षेत्रीय कार्यालयों के अनुसार कचरा डिपो का विभाजन किया जाए।
साथ ही मोशी का कचरा डिपो हटाने की मांग को लेकर गुरुवार (29 तारीख) को नवंबर महाराज मंदिर में बैठक आयोजित की गई। पूर्व नगरसेवक धनंजय आल्हाट ने बताया कि इस बैठक में डिपो हटाने की मांग को लेकर 5 नवंबर को आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है।