पुणे की मुठा घाटी में गहराया जल संकट, टेमघर बांध से पानी बंद होने पर किसानों में आक्रोश
Mutha Valley Water Crisis News: पुणे की मुठा घाटी में टेमघर बांध से पानी छोड़ा जाना बंद होने के कारण गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है। किसान, पशुपालक और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुठा घाटी जल संकट (सौ. सोशल मीडिया )
Mutha Valley Water Crisis Temghar Dam: मुठा घाटी इस समय भीषण जल संकट की चपेट में है। टेमघर बांध से पानी की छोड़ना बंद किए जाने के कारण कातवड़ी-डावजे नदी के किनारे बने सभी बांध और जल स्रोत पूरी तरह सूख गए हैं।
इस विकट स्थिति ने क्षेत्र के किसानों, पशुपालकों और आम ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पिछले आठ दिनों से मुठा नदी में पानी नहीं छोड़ा गया है, जिसके चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
मुठा घाटी के गांवों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मुठा नदी पर टिकी है। विशेष रूप से कातवडी, डावजे और आसपास के क्षेत्रों में गन्ने, सब्जियों और फलों के बागों की व्यापक स्तर पर खेती की जाती है।
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पशुपालकों की बढ़ती मुश्किलें
मुठा नदी का पात्र और बांध सूखने के कारण खड़ी फसलें कुम्हलाने लगी है। किसानों के सामने अपनी साल भर की मेहनत और निवेश को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि जल्द ही पानी नहीं मिला, तो क्षेत्र की कृषि उत्पादकता को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका है।
गर्मी के कारण पानी की मांग बढ़ गई है, लेकिन प्राकृतिक स्रोतों के सूखने से दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों की मुसीबतें दोगुनी हो गई है। मवेशियों के लिए पीने के पानी का इंतजाम करना अव एक कठिन कार्य बन गया है। ग्रामीणों को अब अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
मुठा घाटी के किसान और ग्रामीण आज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। टेमघर बांध से पानी रोकना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। अगर सिंचाई विभाग ने तत्काल नदी में पानी नहीं छोड़ा, तो शिवसेना और युवासेना चुप नहीं बैठेगी। हम किसानों के हक के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
– अमित कुडले, नेता, युवासेना
मुठा नदी हमारे क्षेत्र की जीवनवाहिनी है। आठ दिनों से पानी बंद होने के कारण हमारी फसलें और पशु संकट में है। यदि प्रशासन ने तुरंत पानी नहीं छोड़ा, तो हमें अपनी मांगों के लिए तीव्र आदोलन का रास्ता चुनना होगा।
– प्रसाद केतके, किसान
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सिंचाई विभाग से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग
मई माह की शुरुआत में ही यदि ऐसे हालात हैं, तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो जाएगी। ग्रामीणों और किसान संगठनों ने मांग की है कि सिंचाई विभाग अपनी नींद से जागे और टेमघर बांध से तत्काल मुठा नदी में पानी छोड़े। ग्रामीण एकजुट हो रहे हैं और जल्द ही समाधान न निकलने पर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
