

मुरलीधर मोहोल के बैनर पर विवाद, रुपाली ठोंबरे ने जताई आपत्ति।
ठोंबरे बोलीं- शिवाजी महाराज का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा।
भाजपा पर गठबंधन सहयोगियों की अनदेखी का आरोप।
Murlidhar Mohol Banner Dispute: महाराष्ट्र में विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। नागपुर में सरसंघचालक मोहन भागवत की उपस्थिति में विजयादशमी उत्सव संपन्न हुआ, जबकि पुणे समेत कई शहरों में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया।
इसी बीच पुणे में केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल की ओर से लगाए गए एक बैनर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बैनर में छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और एम. एस. गोलवलकर की तस्वीरें दिखाई देने पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता रुपाली पाटिल ठोंबरे ने आपत्ति जताई है।
रुपाली पाटिल ठोंबरे ने बैनर पर सवाल उठाते हुए मुरलीधर मोहोल की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीर हेडगेवार और गोलवलकर की तस्वीरों के साथ लगाने का अधिकार किसी को नहीं है।
ठोंबरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भाजपा नेताओं से ऐसे मामलों में सावधानी बरतने की अपील की। साथ ही कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं, तो उन्हें अलग तरीके से जवाब देना पड़ेगा।
ठोंबरे ने भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच गठबंधन के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद भाजपा की ओर से उनकी पार्टी के नेताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इस संबंध में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को भी जानकारी दी गई है।
सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के चुनाव का उल्लेख करते हुए ठोंबरे ने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति पर अजित पवार ने वर्षों तक भरोसा जताया, वही अब अलग पैनल बनाकर चुनावी मैदान में उतर रहा है। उन्होंने भाजपा की ओर से ऐसे पैनल को समर्थन दिए जाने की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
ठोंबरे ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव को लेकर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल दलों से विचार-विमर्श किए बिना उम्मीदवार घोषित करना और सहयोगियों पर फैसले थोपना स्वीकार्य नहीं है।
फिलहाल, बैनर को लेकर विवाद के बीच मुरलीधर मोहोल और भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार है। यह मामला अब शिवाजी महाराज की तस्वीर से जुड़े विवाद के साथ-साथ महाराष्ट्र राज्य में गठबंधन के सहयोगियों के बीच तालमेल का मुद्दा भी बन गया है।