महाराष्ट्र में सफर हुआ महंगा: एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर टोल दरों में बढ़ोतरी, अब होगा सिर्फ डिजिटल पेमेंट

Maharashtra Toll Hike News: महाराष्ट्र में आज से सफर करना महंगा हो गया है। NHAI और MSRDC ने टोल दरों में 5% तक की वृद्धि की है। साथ ही, अब कैश पेमेंट पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
Maharashtra Toll Hike Digital Payment
टोल प्लाजा (सोर्स: AI)
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Digital Payment At Toll: महाराष्ट्र के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए आज की सुबह एक बड़ा आर्थिक झटका लेकर आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने राज्य के प्रमुख टोल नाकों पर दरों में 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। यह नई दरें 1 अप्रैल से पूरे राज्य में प्रभावी हो गई हैं।

किन रास्तों पर पड़ा असर?

इस वृद्धि का सबसे बड़ा असर पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे, सोलापुर-पुणे हाईवे और राज्य के अन्य व्यस्ततम मार्गों पर पड़ेगा। मिली जानकारी के अनुसार, NHAI के लगभग 70 और MSRDC के 35 प्रमुख टोल प्लाजा पर नई रेट लिस्ट लगा दी गई है। कार, बस, ट्रक और भारी मालवाहक वाहनों सहित सभी श्रेणियों के लिए शुल्क बढ़ा दिए गए हैं।

नकद भुगतान का दौर खत्म, अब केवल डिजिटल पेमेंट

टोल की बढ़ी हुई दरों के साथ-साथ प्रशासन ने एक और बड़ा बदलाव किया है। अब महाराष्ट्र के टोल नाकों पर नकद भुगतान को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यात्रा को सुगम बनाने और समय की बचत के लिए अब केवल FASTag, UPI या अन्य डिजिटल माध्यमों से ही भुगतान स्वीकार किया जाएगा। यदि किसी वाहन में फास्टैग सक्रिय नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को नियमानुसार दोगुना जुर्माना या डिजिटल माध्यम से तुरंत भुगतान करना होगा।

यात्रियों के लिए जरूरी टिप्स

  • फास्टैग चेक करें: यात्रा शुरू करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपका FASTag सक्रिय है।
  • पर्याप्त बैलेंस: फास्टैग वॉलेट में न्यूनतम बैलेंस से अधिक राशि रखें ताकि टोल प्लाजा पर रुकावट न आए।
  • UPI विकल्प: यदि फास्टैग काम नहीं कर रहा है, तो टोल पर लगे QR कोड को स्कैन कर UPI के जरिए भुगतान करें।
  • आम जनता पर बढ़ता दबाव

महंगाई के दौर में टोल की इन बढ़ती कीमतों ने आम जनता और लॉजिस्टिक सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है। यात्रा महंगी होने से न केवल व्यक्तिगत जेब पर असर पड़ेगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आ सकता है।

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