

Waste Management PCMC Pune News: पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी कचरा डिपो की क्षमता पहले ही समाप्त होने की बात सामने आ रही है। इसी बीच हिंजवड़ी, मान, मारुंजी, नेरे, जांभे, सांगवडे और गहुंजे इन सात गांवों को पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (PCMC) में शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं। इन गांवों के कचरा प्रबंधन को लेकर जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासनिक बैठक प्रस्तावित की गई है। इसके बाद स्थानीय नागरिकों के बीच यह चिंता बढ़ी है कि भविष्य में इन गांवों का कचरा मोशी डिपो पर पहुंच सकता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सात गांवों का कचरा मोशी डिपो में डालने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसी संभावित स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि प्रशासन से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, मोशी डिपो में पिछले करीब 40 वर्षों से 81 एकड़ जमीन पर शहर का कचरा डाला जा रहा है। लंबे समय से कचरा जमा होने के कारण डिपो की क्षमता समाप्त होने की स्थिति बनी हुई है।
करीब दो महीने पहले मोशी डिपो में कचरे के ढेर पर वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की इमारत गिरने की घटना भी सामने आई थी। इस हादसे में नौ कर्मियों की मौत और 12 लोग घायल हुए थे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घटना के बाद भी डिपो में कचरे के ढेर और कचरा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
हिंजवड़ी, मान, मारुंजी, नेरे, जांभे, सांगवडे और गहुंजे को PCMC में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बीच इन गांवों के कचरा प्रबंधन का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर इस संबंध में प्रशासनिक बैठक प्रस्तावित की गई है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को आशंका है कि यदि इन गांवों का कचरा मौजूदा व्यवस्था के तहत मोशी डिपो में लाया गया तो पहले से दबाव में चल रहे डिपो पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर मोशी क्षेत्र के नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
नगरसेवक निखिल बोहाडे ने कहा है कि यदि इन सात गांवों को PCMC महानगरपालिका में शामिल किया जाता है, तो उनके कचरे के निपटारे के लिए मोशी के बाहर वैकल्पिक जगह तय की जानी चाहिए।
बोहाडे के अनुसार, मौजूदा डिपो की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त कचरा मोशी में लाना उचित नहीं होगा। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सात गांवों का कचरा मोशी डिपो में लाने का निर्णय लिया गया और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
सात गांवों के संभावित विलय के साथ उनके कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी PCMC के सामने आएगी। ऐसे में स्थानीय नागरिकों की मांग है कि विलय की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले कचरा संग्रहण, वर्गीकरण, प्रक्रिया और अंतिम निपटारे के लिए स्पष्ट योजना तैयार की जाए।
फिलहाल प्रशासनिक बैठक प्रस्तावित है और सात गांवों के कचरे को मोशी डिपो में डालने का अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाली बैठक और प्रशासन की ओर से तय की जाने वाली कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर स्थानीय नागरिकों की नजर बनी हुई है।