

Manchar Dimbhe Dam Manikdoh Tunnel Project: हुतात्मा बाबू गेनू सागर डिंभे बांध के पानी को माणिकडोह बांध की ओर मोड़ने के लिए प्रस्तावित सुरंग परियोजना को राज्य सरकार की ओर से गति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, सुरंग के निर्माण कार्य के लिए अगले एक महीने में निविदा प्रक्रिया शुरू किए जाने की तैयारी है। वहीं, आगामी तीन वर्षों में सुरंग का निर्माण पूरा करने की योजना बताई जा रही है। इस जानकारी के सामने आने के बाद आंबेगांव, जुन्नर, शिरूर और पारनेर तहसीलों के किसानों में चिंता और नाराजगी का माहौल है।
उनका कहना है कि अपने हक का पानी किसी कीमत पर नहीं जाने देंगे। डिंभे बांध का पानी अन्यत्र मोड़े जाने की स्थिति में भविष्य में इन चारों तहसीलों के किसानों को खेती के लिए मिलने वाले पानी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि पहले ही बारिश की अनिश्चितता, बदलते मौसम और खेती की बढ़ती लागत के कारण कृषि क्षेत्र अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे समय में डिंभे बांध के पानी को माणिकडोह की ओर मोड़ने का निर्णय स्थानीय किसानों के हितों के खिलाफ है।
पुणे बांध का पानी इस क्षेत्र की खेती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी पर किसानों की खेती और फसल उत्पादन काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में बांध के पानी का कुछ हिस्सा दूसरी दिशा में मोड़े जाने से आने वाले वर्षों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की चिंता किसानों द्वारा व्यक्त की जा रही है।
किसानों का कहना है कि किसी भी बड़े जल प्रकल्प का निर्णय लेते समय उस क्षेत्र के किसानों और पानी उपयोगकर्ता संस्थाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।परियोजना की निविदा प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार को आंबेगांव, जुन्नर, शिरूर और पारनेर तहसीलों के किसानों, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित पानी उपयोगकर्ता संस्थाओं के साथ चर्चा करनी चाहिए।
प्रस्तावित सुरंग की निविदा प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आने के बाद किसान संगठनों की ओर से सरकार के समक्ष अपनी भूमिका स्पष्ट करने की तैयारी की जा रही है। पुणे किसानों की मांग है कि परियोजना के संभावित प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया जाए और स्थानीय किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे का निर्णय लिया जाए,
यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी करते हुए परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होने की संभावना है। किसान संगठनों की ओर से इस मुद्दे पर बैठकें लेकर आंदोलन की दिशा तय किए जाने की चर्चा है।