

Pune Kharif Crop: पुणे जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित शिरूर, दौंड, बारामती, इंदापुर और पुरंदर तहसीलों में बारिश के असमान वितरण और लंबे अंतराल के कारण खरीफ फसलों पर पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। जिले में कुल 2,02,263 हेक्टेयर औसत क्षेत्र में से 1,95,908 हेक्टेयर यानी करीब 97 प्रतिशत जमीन पर बुवाई पूरी हो चुकी है।
इसमें लगभग 56 हजार हेक्टेयर धान का क्षेत्र भी शामिल है। जिले के पश्चिमी भाग में बारिश की स्थिति काफी बेहतर है, लेकिन पूर्वी इलाके की पूरी खेती केवल बारिश पर निर्भर होने के कारण वहां संकट गहरा गया है। 1 जून से 29 अगस्त के दौरान भले ही पुरंदर, शिरूर, बारामती और दौंड में कागजों पर औसत से अधिक बारिश दर्ज हुई हो, लेकिन इंदापुर में महज 83 प्रतिशत बारिशहुई है।
पुणे जिले के पूर्वी हिस्से में बारिश का वितरण सही न होने और बीच में लंबा सूखा रहने के कारण मिट्टी की नमी खत्म हो गई है, जिससे बाजरा, तुअर, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों का विकास पूरी तरह रुक गया है। सरकारी आंकड़ों में पूर्वी तहसीलों का कुल वर्षा स्तर भले ही संतोषजनक नजर आ रहा हो, पर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
बारिश की निरंतरता न होने से हल्की जमीनों में नमी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। फसलों के विकास के इस महत्वपूर्ण चरण में पर्याप्त पानी न मिलने से अब किसान फसलों को उर्वरक देने को लेकर भी संदेह में हैं। यदि जल्द ही एक-दो तेज बारिश की बौछारें नहीं हुई, तो फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
पुणे जिले के पूर्वी हिस्से में इस सीजन में धान की 56.525 हेक्टेयर और सोयाबीन की 49, 165 हेक्टेयर में बुवाई हुई है। इसके अलावा बाजरा 35,265 हेक्टेयर, मक्का 31,311 हेक्टेयर, मूंग 4,863 हेक्टेयर, उड़द 1,299 हेक्टेयर, तुअर 1,334 हेक्टेयर, मूंगफली 6, 121 हेक्टेयर और कपास 1,864 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है।
अन्य फसलों में ज्वारी, रागी, तिल और सूरजमुखी की खेती भी शामिल है, एक जून से 29 अगस्त तक जिले के मावल तहसील में 221 प्रतिशत और खेड़ में 201 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। वहीं हवेली में 127 प्रतिशत, मुलशी में 115 प्रतिशत, भोर में 112 प्रतिशत, जुन्नर में 133 प्रतिशत और आंबेगांव तहसील में 160 प्रतिशत बारिश हुई है।
इसके विपरीत वेल्हे तहसील में 75 प्रतिशत और इंदापुर में 83 प्रतिशत ही बारिश हुई है। बारामती तहसील, शिरूर, दौड और पुरंदर में आंकड़े 100 प्रतिशत के पार होने के बावजूद बारिश का लंबा अंतराल खेती के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।
कागजी आंकड़ों में भले ही बारिश पर्याप्त दिख रही हो, लेकिन दो बारिशों के बीच लंबे अंतराल और असमान फैलाव ने फसलों की वृद्धि रोक दी है, जिससे अब केवल जोरदार बारिश ही हमारी फसलों को बचा सकती है।
प्रसाद देसाई, किसान, भोर