Maharashtra Charity Hospitals: महात्मा फुले योजना पर महाराष्ट्र में बड़ा विवाद, निजी अस्पताल पहुंचे हाईकोर्ट

Maharashtra Charity Hospitals News: महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना को लेकर सरकार और निजी अस्पताल आमने-सामने आ गए हैं। अस्पतालों ने कम पैकेज दरों का हवाला देते हुए Bombay HC में याचिका दायर की।
Maharashtra Charity Hospitals Ayushman Yojana Dispute
महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra Charity Hospitals Ayushman Yojana Dispute: महाराष्ट्र के चैरिटी और निजी अस्पतालों में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के अनिवार्य कार्यान्वयन को लेकर राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासनों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है।

राज्य सरकार ने जहां इन योजनाओं को लागू न करने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, वहीं चिकित्सा संगठनों ने इस आदेश को अनुचित बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की शरण ली है। इस विवाद ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य और गरीबों के लिए मुफ्त इलाज की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अस्पताल संगठनों की आपत्तियां

विवाद की जड़ सरकार का वह आदेश है, जिसमें चैरिटी अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना को अनिवार्य बनाया गया है। पुणे के 'असोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स' द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि सरकार द्वारा निर्धारित 'पैकेज रेट्स' बाजार की तुलना में बेहद कम हैं। अस्पतालों का कहना है कि वर्तमान दरों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की फीस, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का रखरखाव और प्रशिक्षित स्टाफ का वेतन निकाल पाना आर्थिक रूप से असंभव है।

नई योजनाओं को जबरन थोपना सही नहीं

वर्तमान में महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों समेत पूरे राज्य में 468 चैरिटी अस्पताल संचालित हैं, जो पहले से ही 2006 के बॉम्बे हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इन नियमों के तहत अस्पताल अपनी कुल बिलिंग का 2% हिस्सा गरीब मरीजों के लिए सुरक्षित रखते हैं और 20% बिस्तर आरक्षित श्रेणी में रखते हैं। अस्पताल संचालकों का पक्ष है कि वे पहले से ही चैरिटी का दायित्व निभा रहे हैं, ऐसे में नई योजनाओं को जबरन थोपना उनके अस्तित्व पर संकट पैदा कर देगा।

कॉर्पोरेट अस्पतालों में महंगी मशीनरी और उच्च तकनीक के कारण सरकारी पैकेज दरों पर सर्जरी करना संभव नहीं है। एसोसिएशन ने इस संबंध में न्यायालय में याचिका दायर की है और बुधवार को होने वाली बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

- डॉ। हणमंत साले, अध्यक्ष, पुणे एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स

निजी अस्पतालों के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हुआ, तो धारा 21 के तहत अनिवार्य उपचार सुनिश्चित करने के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

- ओमप्रकाश शेटे, प्रमुख, आयुष्मान भारत मिशन महाराष्ट्र समिति

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