सगे भतीजे के खिलाफ बारामती सीट पर आज नामांकन दाखिल करेंगे अजित पवार (कांसेप्ट फोटो-सौ. सोशल मीडिया)
पुणे : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार आज बारामती विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं। इससे एक बार फिर से बारामती में परिवार के बीच चुनावी जंग देखने को मिलेगी। सीट सीटे से उनके भतीजे और शरद पवार के पोते युगेंद्र पवार चुनाव लड़ रहे हैं। उनको एनसीपी-एसपी के उम्मीदवार के रूप में शरद पवार ने मैदान में उतार दिया है।
आपको याद होगा कि इस साल की शुरुआत में लोकसभा चुनाव के दौरान शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराया था, जिसके बाद बारामती में एक बार फिर पवार बनाम पवार मुकाबला देखने को मिलेगा। अपने चाचा शरद पवार से भतीजे अजित पवार ने जून 2023 में एनसीपी को तोड़ते हुए अपना राजनीतिक नाता तोड़ लिया था।
अपने चाचा के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ने के बारे में जब शरद पवार के पोते युगेंद्र पवार से पूछा गया, तो उन्होंने कहा “इस सीट पर अजित पवार ने सात बार जीत हासिल की है। यह सब दादा शरद पवार के चलते हुआ है। युगेंद्र पवार ने कहा कि उन्हें लगता है कि पार्टी को तोड़ना काफी दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण कदम था। मुझे लगता है कि यह काफी दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण कदम था कि परिवार में यह सब हुआ। अब तो इसकी शुरुआत विधानसभा में नहीं, बल्कि लोकसभा में हो चुकी है। लेकिन हम तो हमेशा शरद पवार के साथ थे और आगे भी रहेंगे। परिवार के मुखिया शरद पवार साहब के मार्गदर्शन में ही सबका राजनीतिक कद बढ़ा है। पार्टी में जो कुछ हुआ, उसे पूरे भारत ने देखा है। पार्टी टूट गई और चुनाव आयोग ने उन्हें चुनाव चिह्न दे दिया है।”
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युगेंद्र पवार ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन परिवार में हम सभी ने फैसला किया कि हमें पवार साहब के साथ रहना चाहिए, क्योंकि वह एनसीपी के असली संस्थापक हैं, वह परिवार के मुखिया हैं। उनकी वजह से न केवल बारामती बल्कि आसपास के सभी लोग समृद्ध हुए हैं।”
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युगेंद्र पवार को लगता है कि अपने चाचा के खिलाफ लड़ाई कठिन नहीं होगी, लेकिन इतनी आसान भी नहीं होगी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह कठिन होगा, लेकिन मुझे यह भी नहीं लगता कि यह आसान होगा। लेकिन शुरुआत में शरद पवार साहब अजित पवार का समर्थन कर रहे थे, हम उन्हें प्यार से दादा कहते हैं, लेकिन बारामती के लोग बड़ी संख्या में पवार साहब के पीछे हैं और यही उन्होंने लोकसभा में दिखाया है। वे इसे आगामी विधानसभा के साथ-साथ अन्य चुनावों में भी अपना सहयोग देकर दूसरे दलों को हकीकत दिखाएंगे।”
आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को होने वाला है, जबकि सभी 288 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 नवंबर को मतगणना होगी। 2019 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 105 सीटें, शिवसेना ने 56 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं। 2014 में, भाजपा ने 122 सीटें, शिवसेना ने 63 और कांग्रेस ने 42 सीटें हासिल की थी।