

Mahalunge Plot Dispute: पुणे के महालुंगे स्थित विवादित भूखंड के स्वामित्व और कब्जे को लेकर दो बिल्डरों के बीच चल रहा विवाद अब दीवानी और आपराधिक, दोनों स्तरों पर तेज हो गया है। इस मामले में पुणे के वरिष्ठ दीवानी न्यायालय ने संबंधित भूखंड पर अगली सुनवाई तक सभी पक्षों को यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है। वहीं, पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत आने वाले बावधन पुलिस थाने में दोनों पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई परस्पर विरोधी शिकायतों की जांच जारी है।
अदालत में वादी और प्रतिवादी, दोनों पक्षों ने यथास्थिति का आदेश जारी रखने के लिए आवेदन किया था। दोनों पक्षों की सहमति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने विवादित भूमि की वर्तमान स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
इस बीच, तीर्थ रियलिटीज ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गुरुवार को करीब 50 लोग लोहे की रॉड और अन्य सामग्री लेकर सर्वे नंबर 9/10 तथा उससे सटे भूखंड में जबरन प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। शिकायत के अनुसार इस दौरान सीसीटीवी प्रणाली में तोड़फोड़ की गई, जेसीबी की मदद से कुछ संरचनाएं गिराई गईं, साइट कार्यालय को नुकसान पहुंचाया गया, सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की गई तथा 25 हजार रुपये नकद ले जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस मामले में अरुण वेणूनाथ खरडे पाटील, प्रसाद अरुण खरडे पाटील तथा अन्य लगभग 50 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
तीर्थ रियलिटीज ने कथित अतिक्रमण हटाने, आपराधिक मामला दर्ज करने, घटना में इस्तेमाल किए गए वाहनों को जब्त करने, सीसीटीवी एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, गवाहों के बयान दर्ज करने तथा परियोजना और कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
कंपनी के प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों को धमकाकर कानूनी रूप से स्वामित्व वाली संपत्ति पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया गया। साथ ही उन्होंने जांच एजेंसियों पर पूर्ण विश्वास जताया है।
दूसरी ओर, एम.एस. खरडे पाटील ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस में प्रति-शिकायत दर्ज कराई है। फर्म के भागीदार प्रसाद अरुण खरडे पाटील ने दावा किया है कि संबंधित लगभग 15 आर भूमि उन्होंने विधिवत रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से खरीदी है। उन्होंने कहा कि 12 जुलाई 2022 को हुई सरकारी मापी, ऐतिहासिक गूगल मैप्स की तस्वीरें तथा 10 अक्टूबर 2025 का पीएमआरडीए जोनिंग प्रमाणपत्र उनके स्वामित्व की पुष्टि करते हैं।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान उनकी भूमि पर बनी कंपाउंड वॉल गिराने का प्रयास किया गया और उनकी जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की गई। प्रति-शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी महिला और पुरुष कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि केवल अपनी कानूनी संपत्ति की सुरक्षा की है।
इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों का स्वतंत्र सत्यापन अभी तक नहीं हुआ है। विवादित भूखंड के स्वामित्व को लेकर अदालत ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। वहीं, बावधन पुलिस दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, साक्ष्यों और शिकायतों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।