पुणे के कोरेगांव पार्क में लापरवाही, 1 साल के बच्चे को लगाई 2 महीने पुरानी एक्स्पायर्ड JE वैक्सीन

Paedia Pal Clinic Expired Vaccine: पुणे के पीडिया पाल क्लिनिक में 1 साल के मासूम को 2 महीने पुरानी एक्सपायर्ड जापानी एन्सेफेलाइटिस (JE) वैक्सीन लगाने का गंभीर आरोप लगा है। डॉक्टर ने लिखित माफी मांगी।
Doctor and Expired JE Vaccine
डॉक्टर और एक्सपायर्ड JE वैक्सीन(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Japanese Encephalitis Vaccine Expiry Dispute Pune: पुणे के पॉश इलाके कोरेगांव पार्क स्थित 'पीडिया पाल क्लिनिक' (Paedia Pal Clinic) में चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके एक वर्षीय बच्चे को 2 महीने पहले एक्सपायर हो चुकी 'जापानी एन्सेफेलाइटिस' (JE) की वैक्सीन लगा दी गई। टीकाकरण के बाद पैकेजिंग

टीका लगने के बाद पता चली जुलाई 2026 की एक्सपायरी डेट

परिजनों के अनुसार, यह घटना 17 सितंबर को घटी जब वे अपने बच्चे को नियमित टीकाकरण के लिए कोरेगांव पार्क स्थित क्लिनिक ले गए थे। टीका लगाए जाने के तुरंत बाद जब परिजनों की नजर वैक्सीन की शीशी/पैकेजिंग पर पड़ी, तो उस पर अंतिम तिथि (Expiry Date) जुलाई 2026 दर्ज थी। दो महीने पुरानी एक्सपायर्ड दवा मासूम को दिए जाने पर माता-पिता ने तुरंत डॉक्टर और क्लिनिक स्टाफ से तीखे सवाल किए।

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डॉ. बी. एस. रट्टा ने ली जिम्मेदारी, परिजनों को दिया लिखित माफीनामा

मामले के तूल पकड़ने पर क्लिनिक के संचालक डॉ. बी. एस. रट्टा (Dr. B.S. Ratta) ने परिवार को एक लिखित जवाब साझा किया, जिसमें उन्होंने इस लापरवाही के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और घटना की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने परिजनों को आश्वासन दिया कि बच्चे का स्वास्थ्य और सुरक्षा ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि उन्हें इस टीकाकरण के लिए कोई बिल या रसीद (Invoice) भी जारी नहीं की गई थी।

स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल में शिकायत की तैयारी

पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को संबंधित मेडिकल एसोसिएशन, पुणे महानगरपालिका (PMC) के स्वास्थ्य विभाग और नियामक अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे तथा विस्तृत जांच की मांग करेंगे। हालांकि, मीडिया द्वारा डॉ. बी. एस. रट्टा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई अतिरिक्त बयान नहीं आया था। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच प्रशासनिक शिकायत दर्ज होने के बाद आगे बढ़ने की संभावना है।

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