

ICAR Directorate Onion Garlic Research: देश में प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसानों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है। उत्पादन अधिक होने पर बाजार भाव गिरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है,
जबकि फसल कम होने पर कीमतें बढ़ने का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है। अब इस समस्या से निपटने की दिशा में कृषि वैज्ञानिकों ने अहम पहल की है।
महाराष्ट्र के राजगुरुनगर, पुणे स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-डायरेक्टोरेट ऑफ अनियन एंड गार्लिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने प्याज की आठ ऐसी आनुवंशिक किस्मों की पहचान की है, जिनमें अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में स्थिर उत्पादन देने की क्षमता पाई गई है। इन किस्मों से मौसम में सामान्य बदलाव के बावजूद उत्पादन में अचानक भारी गिरावट की आशंका कम हो सकती है।
पुणे स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद वैज्ञानिकों ने रबी सीजन के दौरान देश के पांच अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में इन किस्मों का परीक्षण किया। अलग-अलग मिट्टी, तापमान और बारिश जैसी परिस्थितियों के बावजूद इनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में इनके इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ी हैं।
पहचानी गई किस्मों में लाल प्याज की पांच किस्में शामिल हैं। इनमें RO-1769, RO-1773, RO-1783, भीमा किरण और NHRDF Red-2 शामिल हैं। इन किस्मों को अलग-अलग कृषि परिस्थितियों में स्थिर उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सफेद प्याज की तीन किस्मों ने भी परीक्षण में बेहतर स्थिरता दिखाई। इनमें W-444, W-500 और W-045 शामिल हैं। इनका प्रदर्शन अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में जांचा गया है।
इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत स्थिर उपज देने की क्षमता बताई जा रही है। यदि मौसम के सामान्य उतार-चढ़ाव के बावजूद प्याज का उत्पादन बना रहता है, तो बाजार में इसकी आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। इससे उत्पादन में अचानक कमी आने पर कीमतों में होने वाली तेज बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
इन किस्मों का परीक्षण महाराष्ट्र राज्य के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसी अलग-अलग कृषि परिस्थितियों वाले राज्यों को ध्यान में रखकर किया गया है। ऐसे में भविष्य में इनका इस्तेमाल व्यापक स्तर पर होने पर वर्षभर प्याज की उपलब्धता और किसानों की उत्पादन स्थिरता को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।