

Pune FDA Tukaram Mundhe: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे की सख्त कार्रवाई का असर अब पुणे के खाद्य व्यवसाय क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। विभाग द्वारा लगातार की जा रही जांच और कार्रवाई के बाद होटल संचालक, खाद्य उत्पादक, टिफिन सेंटर संचालक और गृह उद्योगों से जुड़े कारोबारी वैध लाइसेंस एवं पंजीकरण कराने के लिए बड़ी संख्या में आगे आ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस अभियान ने पूरे जिले में जागरूकता बढ़ाई है।
एफडीए से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुणे विभाग को अब तक करीब 9,000 लाइसेंस और पंजीकरण आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र से लगभग 450, पुणे शहर से 1,100 और ग्रामीण क्षेत्रों से 2,400 आवेदन फिलहाल प्रक्रिया में हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में आवेदन संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो विभागीय कार्रवाई के प्रभाव को दर्शाती है।
एफडीए ने खाद्य व्यवसायियों के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन बनाया है। इच्छुक कारोबारी महा ई-सेवा केंद्रों के माध्यम से अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के आधिकारिक वेब पोर्टल पर सीधे आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था के कारण लाइसेंस और पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हुई है, जिससे छोटे व्यवसायियों को भी सुविधा मिल रही है।
खाद्य व्यवसाय के वार्षिक कारोबार के आधार पर पंजीकरण और लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। सालाना 1.5 करोड़ रुपये तक की आय वाले छोटे टिफिन सेंटर, गृह उद्योग और लघु खाद्य व्यवसायों के लिए केवल 100 रुपये का पंजीकरण शुल्क रखा गया है।
वहीं, 1.5 करोड़ रुपये से 50 करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले प्रतिष्ठानों को राज्य लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए 2,000 रुपये से 5,000 रुपये तक शुल्क निर्धारित किया गया है। दूसरी ओर, 50 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाले बड़े कॉर्पोरेट समूहों, ई-कॉमर्स कंपनियों तथा आयात-निर्यात से जुड़े खाद्य उद्योगों को केंद्रीय लाइसेंस लेना होगा, जिसके लिए 7,500 रुपये शुल्क देय है। ऐसे मामलों में एफएसएसएआई की मंजूरी आवश्यक रहती है।
पुणे एफडीए अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का मानना है कि वैध लाइसेंस और पंजीकरण के जरिए खाद्य व्यवसायों की निगरानी बेहतर होगी तथा खाद्य गुणवत्ता से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकेगा।