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FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पुणे में दिवाली फराल की गुणवत्ता की जांच की और लड्डू को हाथ से मसलकर रंग की मात्रा परखी।
मुंढे ने खाद्य कारोबारियों को फराल में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल बंद कर प्राकृतिक रंग अपनाने की सलाह दी।
कुछ मिठाइयों में 100 PPM तक रंग की अनुमति है, जबकि जांचे गए उत्पादों में रंग की मात्रा करीब 30 PPM पाई गई।
Pune FDA Action: दिवाली के मौके पर बाजार में बिकने वाले मिठाई और फराल की गुणवत्ता को लेकर एफडीए ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी बीच एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पुणे में लड्डू और चिवड़ा की गुणवत्ता की खुद जांच कर मिलावटखोरों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फराल में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य पदार्थों में केवल प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने लड्डू को हाथ से मसलकर उसमें रंग की मात्रा भी जांची। उनके अनुसार, प्रयोगशाला जांच में सभी उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं। मुंढे ने बताया कि इस वर्ष फराल तैयार करने की प्रक्रिया में खाद्य सुरक्षा के नियमों का विशेष ध्यान रखा गया है।
खाद्य पदार्थों में रंग के इस्तेमाल पर मुंढे ने कहा कि नियमानुसार कुछ मिठाइयों में 100 पीपीएम तक रंग की अनुमति है। जांच में इन उत्पादों में रंग की मात्रा करीब 30 पीपीएम पाई गई है। सभी नमूने निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं। इसके बावजूद उन्होंने चेंबर को सलाह दी कि कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर केवल प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाए। उन्होंने स्वयं लड्डू को मसलकर भी देखा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें अतिरिक्त रंग या तेल का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है।
एफडीए ने पिछले दो दिनों में खाद्य तेल और मसालों के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। दोनों श्रेणियों में एक-एक हजार से अधिक स्थानों पर जांच की गई। करीब 28 हजार क्विंटल खाद्य तेल और 20 हजार क्विंटल मसालों का स्टॉक जब्त किया गया। उनके अनुसार, महाराष्ट्र में खाद्य तेल और मसालों के मामले में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। नवी मुंबई के एक ड्राईफ्रूट गोदाम में भी अनियमितताएं मिलने पर उसे सील कर आगे की कार्रवाई की गई है।
एफडीए ने त्योहारों के दौरान मिलावट रोकने के लिए चार चरणों में जांच अभियान शुरू किया है। इसमे त्योहार से 21 दिन पहले से लेकर त्योहार के 30 दिन बाद तक कार्रवाई की जाएगी। पहले चरण में निर्माता, गोदाम, थोक विक्रेता और वितरकों की जांच की जाती है, ताकि मिलावटी या घटिया कच्चा माल बाजार तक नहीं पहुंचे। दूसरे चरण में खुदरा दुकानों और फराल विक्रेताओं पर निगरानी रखी जा रही है। यह अभियान केवल दिवाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वर्ष खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच जारी रहेगी।