FDA Maharashtra Junk Food Ban School Zone Rules: पूरे प्रदेश में शैक्षिक परिसरों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध का फैसला तो ले लिया गया है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के पास कारगर एक्शन प्लान नहीं है। खुद एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे शैक्षिक परिसरों के आसपास जंक फूड पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के सवाल पर पशोपेश में नजर आए।
‘अनस्टॉपेबल तुकाराम’ विशेष साक्षात्कार कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों द्वारा एफडीए आयुक्त मुंढे से जंक फूड प्रतिबंध को लेकर सवाल पूछे गए, तो आयुक्त ने स्पष्ट और सीधी रणनीति बताने के बजाय कहा कि स्कूल परिसर के 50 मीटर दायरे में जंक फूड बेचने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि पुणे जैसे घनी आबादी वाले शहरों में जहां दो किलोमीटर के दायरे में कम से कम तीन-चार स्कूल होते हैं, क्या एफडीए के पास इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए कोई विशेष एक्शन प्लान है?
इस पर मुंढे ने कार्रवाई का पूरा जिम्मा स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और अभिभावकों पर डालते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति, शिक्षा विभाग, अभिभावकों और एफडीए के समन्वय से यह कार्रवाई की जाएगी। उनके इस रुख से ऐसा प्रतीत हुआ कि विभाग खुद पहल करने के बजाय केवल शिकायतों का इंतजार करने की नीति अपना रहा है। एफडीए आयुक्त ने कहा कि खाद्य पदार्थों की तरह ही एल्कोहलिक और गैर-अल्कोहलिक पेय पदार्थों में भी मिलावट की शिकायतें बढ़ रही हैं।
तुकाराम मुंढे ने यूपीएससी की तैयारी के दौरान 1996 में पहली बार दिल्ली जाने का किस्सा साझा करते हुए बताया कि वहां जवाहर बुक डिपो से किताबें खरीदने के बाद मैं पहाड़गंज के एक होटल में रुका था। उस समय वेटर ने पूछा, ‘बीयर लाऊं क्या?’ यह सुनते ही मुझे गुस्सा आ गया। मैंने तुरंत अपना बैग पैक किया और रेलवे स्टेशन पहुंच गया। जगह न होने के बावजूद कर्नाटक एक्सप्रेस का जनरल टिकट लिया और शौचालय के पास बैठकर भुसावल तक का सफर किया, फिर वहां से बस पकड़कर संभाजीनगर पहुंचा।
मुंढे से बातचीत के दौरान एफडीए में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सांगली और सातारा जैसे महत्वपूर्ण जिलों में औषधि नियंत्रण (ड्रग कंट्रोल) के लिए एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। वर्क पॉवर संकट पर मुंढे ने स्वीकार किया कि प्रशासन को इस स्थिति की पूरी जानकारी है।
उन्होंने कहा कि हम फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के कुशल उपयोग, आधुनिक तकनीक के सर्वोत्तम इस्तेमाल और मौजूदा अधिकारियों से काम लेने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, जब मुंढे से पूछा गया कि विभाग को नया स्टाफ कब तक मिल जाएगा और सागली-सातारा जैसे जिलों में अधिकारियों की तैनाती कब होगी, तो वे इस सवाल का जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने केवल इतना कहा कि वर्क पॉवर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बाताया की पादा की दिकी पर लगाई गई थी तक भागते थे कि कुछ साल पहले जब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में तंबाकू यह कैसे संभव है?
हमें ‘यह कैसे संभव है’ सोचने के बजाय ‘इसे कैसे संभव बनाया जाए’, इस पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जंक फूड विक्रेताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण बच्चों की सेहत है और शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।