

Fake Sports Certificate: पुणे में महाराष्ट्र के 5 प्रतिशत खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कथित फर्जी ‘कुराश’ प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। पुणे पुलिस की जांच में पुलिस समेत विभिन्न सरकारी विभागों में खेल कोटे के आधार पर भर्ती हुए 71 उम्मीदवारों के प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आए हैं। मामले ने खेल कोटे के जरिए होने वाली सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया और प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुणे पुलिस अब वर्ष 2016 से 2023 के बीच जारी किए गए करीब 1,200 से 1,500 कुराश प्रमाणपत्रों की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि इन प्रमाणपत्रों में दर्ज प्रतियोगिताएं वास्तव में आयोजित हुई थीं या नहीं और संबंधित खिलाड़ियों ने उनमें भाग लिया था या नहीं। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर ऐसे प्रमाणपत्र तैयार किए गए, जिनमें तालुका, जिला और राज्य स्तर की कुराश प्रतियोगिताएं आयोजित होने का उल्लेख था।
पुलिस के मुताबिक जांच में यह आरोप सामने आया है कि प्रमाणपत्रों में जिन प्रतियोगिताओं का उल्लेख किया गया, उनमें से कई प्रतियोगिताएं वास्तव में आयोजित ही नहीं हुई थीं। यदि जांच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो इससे इन प्रमाणपत्रों के आधार पर मिली सरकारी नौकरियों की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों, प्रतियोगिताओं से संबंधित रिकॉर्ड और सरकारी भर्ती में इस्तेमाल किए गए प्रमाणपत्रों की जांच कर रही है।
इस मामले में महाराष्ट्र कुराश एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुश विठ्ठल नगर (40) और सचिव शिवाजी जयवंत सालुंखे (46) को 3 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित प्रमाणपत्र किस प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल सरकारी भर्ती में किस तरह हुआ। मामले की जांच के दौरान प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था से जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पुलिस ने खेल निदेशालय से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि 2023 से अब तक 71 उम्मीदवार कुराश प्रमाणपत्रों के आधार पर खेल कोटे से सरकारी सेवाओं में भर्ती हुए हैं। इन सभी मामलों में प्रमाणपत्रों की सत्यता और भर्ती प्रक्रिया में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने प्रमाणपत्र वास्तविक हैं और कितनी नियुक्तियों पर कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
कुराश प्रमाणपत्रों से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद खेल कोटे के तहत होने वाली सरकारी नियुक्तियों में प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है। पुलिस की जांच अब बड़ी संख्या में जारी किए गए प्रमाणपत्रों और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों तक पहुंच गई है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस मामले में जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट होगी।