पुणे की सड़कों पर गूंजी किलकारी, अस्पताल नहीं पहुंच सकी मां, तो लेडी डॉक्टर ने बीच रास्ते बचाई जान
Roadside Delivery Pune: पुणे के शिरूर में मानवता की मिसाल! अस्पताल पहुंचने से पहले सड़क पर प्रसव पीड़ा झेल रही महिला के लिए डॉ. सुनीता पोटे बनीं देवदूत। जानें पूरी कहानी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सड़क पर हुई प्रसूति (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pregnant Woman Road Delivery: महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता और डॉक्टरी पेशे की गरिमा को एक नई ऊंचाई दी है। शिरूर शहर की एक व्यस्त सड़क पर जब एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा (Labor Pain) से तड़प रही थी और उसका अस्पताल पहुँचना नामुमकिन था, तब एक महिला डॉक्टर ने अपनी सूझबूझ और साहस से बीच सड़क पर ही प्रसूति करवाकर जच्चा और बच्चा दोनों की जान बचा ली।
क्या है पूरी घटना?
पुणे के शिरूर स्थित जोशीवाड़ी की एक गर्भवती महिला को सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। वह अपने परिजनों के साथ शिरूर ग्रामीण अस्पताल की ओर जा रही थी। अस्पताल की दूरी अब चंद कदमों की ही बची थी, लेकिन तभी महिला की पीड़ा असह्य हो गई। दर्द के कारण वह सड़क के बीचों-बीच ही बैठ गई और आगे कदम बढ़ाना उसके लिए असंभव हो गया। सड़क पर भीड़ जमा होने लगी और स्थिति गंभीर होती देख स्थानीय नागरिकों ने पास ही स्थित डॉ. सुनीता पोटे को तुरंत सूचना दी और मदद की गुहार लगाई।
सड़क ही बना लेबर रूम
डॉ. सुनीता पोटे ने बिना एक पल की देरी किए घटनास्थल पर दौड़ लगाई। वहां की स्थिति देखकर डॉक्टर समझ गईं कि महिला को अब अस्पताल ले जाने का समय नहीं बचा है। थोड़ी सी भी देरी जच्चा या बच्चा, किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती थी।भीड़ और तनावपूर्ण माहौल के बीच डॉ. पोटे ने बेहद कड़ा निर्णय लिया सड़क पर ही प्रसूति करवाने का (Roadside Delivery Pune)। उन्होंने स्थानीय महिलाओं की मदद से घेरा बनाया और सुरक्षित तरीके से डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू की। कुछ ही मिनटों के भारी तनाव के बाद जब नवजात के रोने की आवाज गूंजी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
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यशोमती ठाकुर का ट्वीट और सरकार पर निशाना
इस घटना की गूंज राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दी। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता एडवोकेट यशोमती ठाकुर ने ट्वीट कर डॉ. सुनीता पोटे और डॉ. संकेत घोड़े के साहस की सराहना की। हालांकि, उन्होंने इस मामले में प्रशासन और सरकार को घेरते हुए एक गंभीर आरोप भी लगाया। ठाकुर ने ट्वीट में कहा कि बताया जा रहा है कि यह महिला चार दिन पहले सरकारी अस्पताल गई थी, लेकिन रिपोर्ट न होने के कारण उसे इलाज देने से मना कर दिया गया। महायुति सरकार गरीब गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे और स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि पता चल सके कि महिला को अस्पताल से क्यों लौटाया गया था।
पुणे जिल्ह्यातील शिरूर येथे एक महिला रस्त्यावर प्रसूत झाली. लोकांचा मोठा जमाव आणि बाळ बेशुद्ध… या घटनेची माहिती समजताच डॉ. सुनीता पोटे त्या महिलेसाठी धाऊन गेल्या. नवजात बालक आणि आईची रस्त्यात कठीण परिस्थिती लक्षात घेत प्रसूती पार पाडली. बाळाला जीवदान दिले. डॉक्टर सुनीता पोटे… pic.twitter.com/EX5UeQ0Hhh — Adv. Yashomati Thakur (@AdvYashomatiINC) April 25, 2026
मानवता की मिसाल
भले ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हों, लेकिन शिरूर की जनता डॉ. सुनीता पोटे को ‘देवदूत’ मान रही है। साथ ही उस ब्लड बैंक की भी सराहना की जा रही है जिसने आपातकालीन स्थिति में मां को मुफ्त ब्लड यूनिट उपलब्ध कराया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अगर कर्तव्य और संवेदना का साथ हो, तो चमत्कार संभव है।
