पुणे के बांधों में 80% से ज्यादा पानी, एक साल की पेयजल चिंता खत्म; गंदे पानी की सप्लाई बनी चुनौती
Pune Khadakwasla Dam: पुणे के खड़कवासला डैम श्रृंखला में 80% से अधिक पानी जमा। मुठा नदी में पानी छोड़े जाने के साथ ही शहर के कई इलाकों में मटमैले पानी की आपूर्ति से स्वास्थ्य संकट।
- Written By: रूपम सिंह
खड़कवासला बांध सांकेतिक (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Pune Khadakwasla Dam Chain Water Level: पुणे में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पुणे शहर को बड़ी राहत दी है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली खड़कवासला डैम श्रृंखला के चारों प्रमुख बांध खड़कवासला, पानशेत, वरसगांव और टेमघर में जल स्तर तेजी से बढ़ा है। चारों बांधों में कुल उपयोगी जल भंडारण 23.42 टीएमसी, यानी लगभग 80.35 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो
पिछले वर्ष की समान अवधि के लगभग बराबर है। इससे पुणेवासियों की अगले एक वर्ष तक पेयजल की चिंता काफी हद तक समाप्त हो गई है। हालांकि गंदे पानी की आपूर्ति होने से लोगों के सामने स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। बता दें कि खड़कवासला डैम पूरी क्षमता से भर है। सुरक्षा के मद्देनजर मुठा नदी में स्पिलवे से 9,373 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
चुका पिछले 24 घंटों में चारों बांधों के जल भंडारण में 1.72 टीएमसी की वृद्धि हुई है। जल संसाधन विभाग ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, नदी के तल में नहीं उतरने और सामान सुरक्षित स्थान पर रखने की अपील की है। भीमा घाटी के कलमोडी, चासकमान, वडीवले, वीर और खड़कवासला सहित पांच बांध पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि पवना, कासारसाई, भामा आसखेड, आंध्र और मुलशी बांधों में 90 प्रतिशत से अधिक पानी जमा हो चुका है।
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शहर की जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित
बांधों के भरने से राहत जरूर मिली है, लेकिन भारी बारिश के कारण जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई है। जलाशयों में कच्चे पानी का मैलापन बढ़ने से हडपसर, कात्रज, वानवडी, सहकारनगर, लश्कर, येवलेवाडी, सिंहगढ़ रोड और शहर के कई मध्यवर्ती इलाकों में नलों से मटमैला पानी पहुंच रहा है। स्थायी समिति की बैठक और पर्वती जलशोधन केंद्र के निरीक्षण के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के कारण पेट दर्द, – उल्टी, दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
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राज्य में असमान रही बारिश
- पुणे महानगर पालिका के जलापूर्ति विभाग ने दावा किया है कि पानी का पूर्ण निर्जंतुकीकरण कर ही आपूर्ति की जा रही है। नागरिकों को फिटकरी डालकर पानी का मैलापन नीचे बैठाने, उसे छानने और उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
- दूसरी ओर, जुलाई की अच्छी बारिश से महाराष्ट्र के 3,029 बांधों में कुल जल भंडारण बढ़कर 56% यानी 803 टीएमसी पहुंच गया है, जबकि जून के अंत में यह केवल 22% था।
- कोकण, पुणे और नासिक में जल भंडारण संतोषजनक है, लेकिन मराठवाड़ा और विदर्भके कई हिस्सों में अब भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग में जल स्तर केवल 28 प्रतिशत है, जबकि जायकवाड़ी बांध में 39 प्रतिशत पानी है। ऐसे में पुणे और पश्चिमी महाराष्ट्र को राहत मिली है।
पुणे जिले की मौजूदा स्थिति
- खडकवासला डैम श्रृंखला 24.87 टीएमसी (85%) पानी भंडारण
- वीर प्रणाली 39.51 टीएमसी (82%)
- पवना 97%, भामा आसखेड 92%, चासकमान 92%, आंध्रा 100%
कहां कितना पानी का स्टॉक
| विभाग | उपयुक्त पानी स्टॉक |
|---|---|
| राज्य | 803 टीएमसी (56%) |
| पुणे | 368.5 टीएमसी (68%) |
| कोकण | 102.3 टीएमसी (79%) |
| नाशिक | 122.6 टीएमसी (58%) |
| नागपुर | 78.6 टीएमसी (47%) |
| अमरावती | 59.7 टीएमसी (43%) |
| संभाजीनगर | 71.1 टीएमसी (28%) |
