पुणे में रोज 52 करोड़ लीटर पानी हो रहा बर्बाद: रिसाव से बढ़ा जल संकट, पर्यावरण रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Pune Water Leakage Crisis: पुणे मनपा की 'पर्यावरण रिपोर्ट 2025-26' में बड़ा खुलासा: पाइपलाइनों में रिसाव से रोज 52.22 करोड़ लीटर पानी बर्बाद। बाढ़ और जल संकट की दी चेतावनी।
- Written By: रूपम सिंह
पुणे जल संकट (फोटो- सोशल मीडिया)
Pune PMC Environment Status Report: तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के लगातार विस्तार के बीच पुणे की पानी की जरूरत हर साल बढ़ रही है। लेकिन जलापूर्ति व्यवस्था में भारी रिसाव के कारण हर दिन करोड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। पुणे महानगर पालिका के पर्यावरण विभाग की ओर से तैयार ‘पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट 2025-26’ में खुलासा हुआ है कि शहर की जल वितरण व्यवस्था से प्रतिदिन 522.19 मिलियन लीटर (करीब 52.22 करोड़ लीटर) पानी रिसाव के कारण नष्ट हो रहा है।
यही वजह है कि शहर की वास्तविक दैनिक आवश्यकता 1,110.18 मिलियन लीटर होने के बावजूद रिसाव को जोड़ने पर कुल जरूरत बढ़कर 1,631.84 मिलियन लीटर प्रतिदिन पहुंच जाती है। महानगर पालिका ने यह रिपोर्ट मंजूरी के लिए मुख्य सभा के समक्ष रखी है।
रिपोर्ट में जल प्रबंधन, नदी संरक्षण और भविष्य में बढ़ने वाले जल संकट को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। इसमें कहा गया है कि यदि समय रहते जल वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में शहर को पानी की कमी और बाढ़ जैसी दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे की वार्षिक जल आवश्यकता 21.03 टीएमसी है, जबकि राज्य सरकार से शहर को फिलहाल 16।36 टीएमसी पानी का ही अधिकृत कोटा मिला है।
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4.67 टीएमसी का अंतर, नया जल स्रोत जरूरी
उपलब्ध पानी और वास्तविक जरूरत के बीच करीब 4.67 टीएमसी का अंतर पहले से मौजूद है। ऐसे में पाइपलाइन से हो रहे पानी के रिसाव को रोकना महानगरपालिका के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल नए जल स्रोत विकसित करना भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक प्रबंधन, वितरण प्रणाली में सुधार और जल संरक्षण
पर समान रूप से ध्यान देना होगा,
जल वितरण नेटवर्क होगा आधुनिक
विशेष रूप से पाइप लाइन से होने वाले पानी के नुकसान को कम किए बिना शहर की बढ़ती मांग पूरी करना मुश्किल होगा। महानगरपालिका ने पूरे शहर में 24 घंटे समान जलापूर्ति (24×7 वाटर सप्लाई) लागू करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जल वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
योजना के तहत 82 नई जल भंडारण टंकियां बनाई जाएंगी और 3.15 लाख पानी के मीटर लगाए जाएंगे। इससे प्रत्येक उपभोक्ता की वास्तविक खपत का रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, पानी की बर्बादी कम होगी और बिलिंग प्रणाली भी अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
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रिपोर्ट में सीवेज प्रबंधन को भी भविष्य की जल सुरक्षा से जोड़ा गया है। पिछले वर्षों में शहर में 567 एमएलडी क्षमता वाले 10 सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित किए गए है। अब जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) के सहयोग से इनकी क्षमता और बढ़ाई जा रही है, ताकि भविष्य में शहर का पूरा सीवेज उपचारित करने के बाद
ही नदी में छोड़ा जाए और उपचारित पानी का अधिकतम पुनः उपयोग किया जा सके, महानगरपालिका का मानना है कि भविष्य में पुणे शहर की जल सुरक्षा केवल अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि रिसाव रोकने, जल संरक्षण, मीटर आधारित वितरण, उपचारित पानी के पुनः उपयोग और नदीं तंत्र के संरक्षण जैसी दीर्घकालिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से ही सुनिश्चित की जा सकेगी।
बाढ़ का खतरा भी बरकरार
पर्यावरण रिपोर्ट में जल संकट के साथ-साथ बाढ़ के बढ़ते खतरे को लेकर भी आगाह किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नदी किनारे बढ़ते अतिक्रमण, नालों और प्राकृतिक जलमार्गों में किए गए भराव तथा अनियोजित निर्माण के कारण बरसात के दौरान पानी के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है। इससे शहर के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट में खड़कवासला बांध से मुळा-मुठा संगम तक मुठा नदी के लिए 60 हजार क्यूसेक को चेतावनी स्तर और 1 लाख क्यूसेक को खतरे का स्तर निर्धारित किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि नदी तट विकास, बाढ़ रेखा और बढते शहरीकरण को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण की योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी होगा।
