छत्रपति शिवाजी जयंती उत्सव (सौजन्य-सोशल मीडिया, नवभारत)
पुणे: छत्रपति शिवजाी महाराज की जयंती जल्द ही 19 फरवरी को महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाई जाएगी। लेकिन ये सिर्फ महाराष्ट्र में सीमित न रहते हुए इस बाद राज्य के बाहर भी मनाई जाने वाली है, जिसके लिए लोगों में काफी उत्साह है। छत्रपति शिवाजी महाराज का वास्तविक इतिहास केवल महाराष्ट्र के शिवप्रेमियों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों को पता होना चाहिए।
साथ ही, छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों से हमारे देश के सैनिकों को भी प्रेरणा मिले, इस उद्देश्य से इस वर्ष सीमा सुरक्षा बल और भारतीय सेना के जवानों के साथ शिवजयंती को सीमावर्ती क्षेत्र में मनाया जाएगा। मराठा टाइगर फोर्स द्वारा हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती का आयोजन किया जाता है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 22 फरवरी को राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित श्री तनोट राय माता मंदिर परिसर में सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ शिवजयंती के ऐतिहासिक समारोह का आयोजन किया गया है। इस बारे में मराठा टाइगर फोर्स के संस्थापक अध्यक्ष और राजस्थान शिवजयंती उत्सव समिति के उत्सव प्रमुख संदीप लहाने पाटील ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी।
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इस अवसर पर संतोष शिंदे (प्रवक्ता, संभाजी ब्रिगेड, राजस्थान शिवजयंती उत्सव समिति सदस्य), शरद लोंढे पाटील (सह-उत्सव प्रमुख, राजस्थान शिवजयंती उत्सव समिति), अनिल मोरे (राजस्थान शिवजयंती उत्सव समिति सदस्य), महेश टेडे पाटील, विजयराव काकडे (भारत क्रांति मिशन प्रमुख), विजय आप्पा बराटे, विशाल लहाने पाटील, रमेश पाटील, यशवंत जगताप, व्यंकटेश देशमुख सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
शिवाजी प्रथम (19 फरवरी 1630 – 3 अप्रैल 1680) एक भारतीय शासक और भोंसले राजवंश के सदस्य थे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने बीजापुर सल्तनत से अपना स्वतंत्र राज्य बनाया जिसने मराठा संघ की उत्पत्ति की। अपने जीवनकाल में शिवाजी ने मुगल साम्राज्य, गोलकुंडा सल्तनत, बीजापुर सल्तनत और यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों के साथ गठबंधन और शत्रुता दोनों में भाग लिया।