

राष्ट्रीय कार्यशाला में 600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था।
प्रा. मिलिंद मराठे ने अधूरी जानकारी के आधार पर राय बनाने से बचने की सलाह दी।
विद्यार्थियों को अहिल्याबाई होलकर के जीवन और कार्यों से परिचित कराया जाएगा।
Youth Inspiration Workshop Pune: महात्मा ज्योतिराव फुले ने महिला शिक्षा और वंचितों को शिक्षित करने के लिए कार्य कर समाज को परिवर्तन का संदेश दिया। युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर अपना करियर संवारना चाहिए।
साथ ही समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके समाधान के लिए भी योगदान देना चाहिए। यह अपील राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने रविवार को की। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी), सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय और समर्थ युवा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘महात्मा ज्योतिराव फुले और आज की युवा पीढ़ी’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में पाटील बोल रहे थे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रा. मिलिंद मराठे, न्यास के विश्वस्त राजेश पांडे, विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. पराग कालकर, कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल पवार, प्रबंधन परिषद की सदस्य बागेश्री मंठालकर, राष्ट्रीय सेवा योजना के संचालक डॉ. गणेश भामे और टीजे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय चाकणे उपस्थित थे।
कार्यशाला के लिए 600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था, जबकि 480 विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। पाटील ने कहा कि हम अक्सर महापुरुषों को केवल उनकी तस्वीरों तक सीमित कर देते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज, राजर्षि शाहू महाराज, महात्मा फुले, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और अहिल्याबाई होलकर के जीवन से प्रेरणा लेकर युवाओं को अपने लक्ष्य तय करने चाहिए।
हर दौर की चुनौतियां अलग होती हैं। ऐसे में समाजसेवा की भावना के साथ आगे आकर समस्याओं के समाधान के लिए काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना काम बेहतर तरीके से करते हुए महापुरुषों के विचारों को मार्गदर्शक बनाना चाहिए।
समाज में होने वाली घटनाओं और समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। केवल अपनी तरक्की तक सीमित न रहकर समाज के लिए भी योगदान देने से जीवन को वास्तविक अर्थ और आनंद मिलता है।
प्रा. मिलिंद मराठे ने कहा कि युवाओं को विचार करना चाहिए कि कहीं वे सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर अपनी राय तो नहीं बना रहे हैं। देश के संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करते समय अधूरी जानकारी के आधार पर बहस जीतने के बजाय दूसरों को सुनना, चिंतन करना और मूल पुस्तकों का अध्ययन करना अधिक महत्वपूर्ण है।
महात्मा फुले जैसे महापुरुषों के विचारों का अध्ययन कर उनकी प्रेरणा को जीवन में उतारा जा सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ने के साथ लिखने की आदत भी विकसित करनी चाहिए, ताकि वे अपने विचार स्पष्टता से व्यक्त कर सकें। राजेश पांडे ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महात्मा फुले के विचारों को आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके सामाजिक कार्यों से परिचित कराना था।
शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाने की फुले की भूमिका को समझते हुए युवाओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी पहचाननी चाहिए। पढ़ने, चिंतन करने और सामाजिक प्रतिबद्धता के जरिए नई पीढ़ी को दिशा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी किए जाएंगे।
दो दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और महात्मा फुले के जीवन तथा विचारों को समझा। अगली कार्यशाला अहिल्याबाई होलकर के जीवनकार्य पर आयोजित की जाएगी। डॉ. चाकणे ने यह जानकारी दी, जबकि बागेश्री मंठालकर ने आभार माना।
महात्मा ज्योतिराव फुले के विचारों को अपनाकर युवाओं को समतावादी, आत्मनिर्भर और ज्ञानसमृद्ध राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना चाहिए। तकनीक के इस दौर में युवाओं को सही दिशा देने के साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक प्रतिबद्धता को बनाए रखना जरूरी है।
सोशल मीडिया की रील की आभासी दुनिया के बजाय महात्मा फुले के जीवन और कार्यों से मिलने वाली वास्तविक प्रेरणा को अपनाकर विद्यार्थियों को अपने भविष्य की नींव रखनी चाहिए। यह विश्वास विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. पराग कालकर ने व्यक्त किया।