अजित पवार के किले में लगी सेंध, बारामती में बड़े उलटफेर का संकेत, त्रिकोणीय हुआ मुकबला

Vijay Shivtare Baramati Fight
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  • अजित पवार के विरोध में विजय शिवतारे ने खोला मोर्चा
  • शिवतारे ने की निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा
  • बारामती में चरम पर पहुंची चुनावी सरगर्मी 

पुणे: बारामती लोकसभा (Lok Sabha) क्षेत्र में एक तरफ सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार की प्रतिष्ठा की लड़ाई की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे की शिवसेना के एक पूर्व विधायक तथा शिवसेना नेता विजय शिवतारे (Vijay Shivtare) के अजित पवार (Ajit Pawar) और उनके पूरे परिवार के खिलाफ मोर्चा खोल देने से सियासी माहौल गरमा गया है। शिवतारे ने बुधवार (13 मार्च) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बारामती(Baramati) लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय (Independent) चुनाव (Election) लड़ने की घोषणा की है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि बारामती में लोकसभा चुनाव अब त्रिकोणीय होगा। 

एनसीपी में राजनीतिक विवाद और फूट के बाद बारामती लोकसभा चुनाव अजित पवार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। सुप्रिया सुले के खिलाफ उन्होंने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को बारामती लोकसभा क्षेत्र में उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है। वहीं अब शिवसेना के पूर्व विधायक विजय शिवतारे ने बारामती लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। शिवतारे ने यह भी घोषणा कर दी है कि वह बारामती लोकसभा से निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। पदाधिकारियों की बैठक में इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है, यह जानकारी भी शिवतारे ने दी है। 

विजय शिवतारे ने कहा है कि, बारामती निर्वाचन क्षेत्र किसी की जागीर नहीं है। यह देश के 543 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक लोकसभा क्षेत्र है और इसका कोई मालिक नहीं है। इस लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र हैं और इसलिए हमें निश्चित रूप से अपना स्वाभिमान मजबूत रखते हुए चुनाव लड़ना चाहिए। यह मेरे लिए सम्मान की लड़ाई है और यह लड़ाई मैं अपने समर्थकों के बल पर लढूंगा। हालांकि मैंने 2019 के चुनाव में अजित पवार के बेटे के खिलाफ प्रचार किया था, लेकिन मैंने इसे राजनीति और अपने कर्तव्य के हिस्से के रूप में किया, व्यक्तिगत नहीं, पर अजित पवार सभ्यता के निम्नतम स्तर पर पहुंच गए। मैं उपचार के लिए 23 दिन लिलावती अस्पताल में भर्ती था, इस दौरान मुझसे बाईपास करने के लिए कहा गया, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने पूरा अभियान एक एम्बुलेंस से चलाया। 

अजित पवार द्वारा पिछले विधानसभा चुनाव में विजय शिवतारे को चुनाव में हराने के बारे में किया गया वक्तव्य सोशल मीडिया में भी वायरल हो गया था। शिवतारे ने उस वक्तव्य को दोहराते हुए कहा कि, राजनीति में किसी को भी चुनने की सकारात्मक प्रवृत्ति रखनी चाहिए। दबंगई करके किसी को चुनाव में हराने की धमकी देना लोकतंत्र के खिलाफ हैं। हालांकि मैंने उस वक्तव्य के बारे में अजित पवार को माफ कर दिया था। महायुति में शामिल होने के बाद मैंने अजित पवार से मुलाकात की और उन्हें बधाई दी, लेकिन अगले छह से सात महीनों के लिए, उनका गुस्सा वैसा ही रहा। उनका अहंकार बरकरार था। इसलिए लोगों ने कहा है कि हम अजित पवार को वोट नहीं देंगे। लोगों की राय अजीत पवार के खिलाफ हैं। पवार परिवार द्वारा लोगों को फंसाया जा रहा है। 

बारामती में 5,80,000 मतदाता विरोध में
बारामती में 6,80,000 वोट पवार के समर्थन में हैं, लेकिन 5 लाख 80 हजार वोट विपक्ष में हैं। इसलिए सुनेत्रा पवार या सुप्रिया सुले को हराया नहीं जा सकता, ऐसा नहीं है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से हर नागरिक के वोट का मूल्य समान रखा है। भारतीय नागरिक को लोकतंत्र में वोट देने का समान अधिकार है। लोग बिना किसी से डरे वोट करें, यह बात भी इस दौरान विजय शिवतारे ने अपने पक्ष में रखी। 

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