पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में पदों का रोटेशन प्लान, असंतोष थामने की भाजपा की नई रणनीति
PCMC में बहुमत के बाद भाजपा ने महापौर, उपमहापौर और स्वीकृत नगरसेवक पदों के लिए ‘सवा साल’ रोटेशन फॉर्मूला तैयार किया है, जिससे अधिक से अधिक नेताओं को सत्ता में भागीदारी मिल सके।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिपरी-चिंचवड मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Pimpri Chinchwad Civic Politics: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका में स्पष्ट बहुमत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने नगरसेवकों और पदाधिकारियों के बीच संभावित असंतोष को थामने के लिए ‘सवा वर्ष’ का विशेष फॉर्मूला तैयार किया है।
इस रणनीति के तहत महापौर, उपमहापौर और स्वीकृत नगरसेवक जैसे महत्वपूर्ण पदों के कार्यकाल को विभाजित किया जाएगा, ताकि अधिकतम इच्छुक उम्मीदवारों को सत्ता में भागीदारी का अवसर मिल सके।
वर्तमान में महापौर के रूप में रवि लांडगे, उपमहापौर के रूप में शर्मिला बाबर और सत्तारूढ़ दल के नेता के रूप में प्रशांत शितोले जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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चूंकि महापौर का पद ढाई वर्ष के लिए आरक्षित होता है, इसलिए चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व इसे सवा-सवा साल के दो चरणों में बांटकर दो अलग-अलग चेहरों को मौका देगा।
यही नीति स्थायी समिति पर भी लागू हो सकती है, जहां 11 सदस्यों को एक-एक वर्ष का कार्यकाल देकर पांच वर्षों में कुल 55 नगरसेवकों को समिति का हिस्सा बनाया जा सकता है।
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नाराजगी दूर करने का प्रयास, मनोनीतों पर भी खींचतान
- मनोनीत (स्वीकृत) नगरसेवक पद को लेकर भी भाजपा में भारी खींचतान है। राज्य सरकार के नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक 12 नगरसेवकों पर एक स्वीकृत सदस्य के अनुपात में भाजपा के कोटे में सात सीटें आती हैं।
- पार्टी इन सात सीटों पर भी सवा-सवा साल के अंतराल में नए सदस्यों की नियुक्ति कर सकती है। यदि यह फॉर्मूला लागू होता है, तो अगले पांच वर्षों में लगभग 40 स्वीकृत सदस्य सदन तक पहुंच सकेंगे। इसमें उन प्रभावशाली नेताओं और कर्मठ कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो चुनाव हार गए थे या जिन्हें टिकट नहीं मिल सका था।
