पुणे में हर 3 में से 1 वोटर नॉट रीचेबल, ASDD रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, लाखों मतदाता जांच के घेरे में

Pune Voter List: पुणे की वोटर सूची पर सवाल, एएसडीडी रिपोर्ट में 90.80 लाख में से 28.68 लाख मतदाता सत्यापन योग्य पाए गए, यानी हर तीन में से एक वोटर का पता, स्थिति दोबारा जांचनी होगी।
voter list
वोटर लिस्टsocial media
Published on
Updated on

ASDD Report On Pune Voters: आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पुणे जिले की मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 24 अगस्त 2026 की एएसडीडी (एबसेंट, शिफ्टेड, डेड या डुप्लीकेट) रिपोर्ट के अनुसार, जिले के कुल 90 लाख 80 हजार 173 मतदाताओं में से 28 लाख 68 हजार 223 यानी 31.58 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं, जिनकी मौजूदगी, पता या स्थिति का दोबारा सत्यापन जरूरी है। यानी जिले में लगभग हर तीन में से एक मतदाता ‘नॉट रीचेबल’ या सत्यापन योग्य श्रेणी में है।

हालांकि, एएसडीडी सूची में किसी मतदाता का नाम शामिल होना उसके अपात्र होने का प्रमाण नहीं है। निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि कौन-से नाम हटाए जाएंगे, अपडेट किए जाएंगे या मतदाता सूची में बने रहेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, 17 लाख 83 हजार 58 मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। वहीं, 5 लाख 91 हजार 38 मतदाताओं के दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 3 लाख 12 हजार 48 मृत व्यक्तियों के नाम और 1 लाख 43 हजार 975 मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं।

हडपसर, खड़कवासला और चिंचवड़ सबसे आगे

एएसडीडी मतदाताओं की संख्या में हडपसर 2,98,427 के साथ सबसे आगे है। इसके बाद खड़कवासला में 2,78,078 और पिंपरी चिंचवड़ में 2,70,023 ऐसे मतदाता पाए गए हैं। कोथरूड में 2,07,103, वडगांव शेरी में 2,04,018, पुरंदर में 1,87,471, भोसरी में 1,73,207, पिंपरी में 1,65,795 और पार्वती में 1,51,882 मतदाता इस श्रेणी में हैं।

शहरी क्षेत्रों में संख्या अधिक होने का एक कारण पुणे का शिक्षा और आईटी केंद्र होना भी माना जा रहा है। बड़ी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा लोग पढ़ाई या नौकरी के बाद शहर छोड़ देते हैं, लेकिन उनके पुराने पते पर नाम दर्ज रह सकते हैं ।इतने बड़े पैमाने पर अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची में होने से चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.

चुनावी प्रक्रिया पर असर की आशंका

एसआईआर के बाद पुणे जिले के 21 विधानसभा क्षेत्रों की प्रारूप मतदाता सूची जारी की गई है। उपजिला निर्वाचन अधिकारी मीनल कलसकर के अनुसार, सत्यापन के दौरान करीब 17.83 लाख मतदाता अपने पते पर नहीं मिले और आवश्यक आवेदन नहीं किए जाने के कारण उनके नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए। इतनी बड़ी संख्या में अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाताओं के कारण मतदान प्रतिशत, बूथ स्तर पर संपर्क और चुनावी प्रबंधन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, एएसडीडी आंकड़ों को सीधे तौर पर ‘बोगस वोटिंग’ का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अब प्रशासन के सामने 28.68 लाख नामों के सत्यापन की बड़ी चुनौती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com