बारामती प्लेन क्रैश (सौ. सोशल मीडिया )
Baramati Plane Crash News: बारामती का एयरपोर्ट, जहां डिप्टी सीएम अजीत पवार का प्लेन क्रैश हुआ। हादसे की वजहों को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। कोई विमान में तकनीकी खामी की बात कर रहा है तो कोई पायलट की गलती बता रहा है।
एक कड़ी बारामती एयरपोर्ट के टेबलटॉप रनवे को भी जोड़ती है। हादसे से पहले क्रू मेंबर्स की ओर से कोई मेडे कॉल भी नहीं किया गया। दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश में विमान क्रैश हो गया। इसे पवार परिवार की पहल पर ही बनाया गया था।
कहा जा सकता है कि उनका अपना बनाया एयरपोर्ट ही काल बन गया। केंद्रीय एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू के मुताबिक, बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग की पहली कोशिश नाकाम रहने पर पायलट विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले गई।
दूसरी कोशिश रनवे-11 पर की गई, लेकिन विमान रनवे से पहले ही गिर गया और उसमें आग लग गई। ये सब इतना जल्दी हुआ कि उन्हें मेडे कॉल करने का भी वक्त नहीं मिला। बारामती एयरपोर्ट इस हादसे का गवाह बना, उसके बारे में समझते हैं। साल 1996 में बारामती एयरपोर्ट का निर्माण किया गया। करीब तीन दशक पुराने इस एयरपोर्ट पर कमर्शियल प्लेन नहीं उत्तरते हैं, बल्कि इसमें पायलट ट्रेनिंग, कॉरपोरेट ट्रैवल या वीआईपी मूवमेंट के दौरान लैंडिंग के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।
यहां रनवे काफी छोटा है, जिसकी वजह से लैंडिंग के दौरान प्लेन को रनवे पर सीधे उतरने के बजाय एक बड़ा घुमाव लेना पड़ा। लैंडिंग के लिए पायलट को दूसरी बार कोशिश करनी पड़ी। पायलट को सेकेंड अप्रोच के दौरान रनवे नहीं दिखा और प्लेन क्रैश हो गया। बारामती में छोटा एयरस्ट्रिप है, जिसमें बड़े एयरपोर्ट जैसे बेहतर लैंडिंग सिस्टम नहीं हैं।
यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की कमी है। इसी ILS की मदद से पायलट प्लेन को रनवे से एलाइन करते हैं। बारामती एयरपोर्ट पर इसकी कमी के चलते पायलट को विजुअल अप्रोच रखना पता है। यानी आंखों से रनवे की पहचान करके लैंडिंग करनी पड़ती है।
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रनवे की दूरी से लेकर एंगल का अंदाजा मैन्युअल लगाना पड़ता है। ऐसे में गलती की संभावना बहुत बढ़ जाती है। थोड़ा सा अलाइनमेंट जानलेवा साबित हो सकता है। धुंध और कोहरे की वजह से लो विजिबिलिटी की स्थिति में ILS लैंडिंग में मदद करता है। वहीं इस एयरपोर्ट के आसपास खेती होने की वजह से पक्षियों के टकराने की संभावना काफी हाई होती है। एयरपोर्ट के पास विमान कम ऊंचाई पर होते हैं। ऐसे में पक्षियों के टकराने से हादसे होने की संभावना हाई रहती है। इससे निपटने के लिए भी बारामती एयरपोर्ट पर इंतजाम नहीं किए गए हैं।