Supriya Sule – Ajit Pawar: जब अजित पवार को मनाने उतरी थीं सुप्रिया सुले, 80 घंटे में करवायी थी घर वापसी
Ajit Pawar Death News: 2019 के महाराष्ट्र सत्ता संघर्ष में अजित पवार की एनसीपी वापसी कैसे हुई, इसमें सुप्रिया सुले, प्रतिभा पवार और शरद पवार की भूमिका को किताब ‘35 डेज’ में उजागर किया गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
अजित पवार और सुप्रिया सुले (सौ. सोशल मीडिया )
Ajit Pawar Supriya Sule Relation: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज प्लेन दुर्घटना में निधन हो गया है। इस खबर से महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक का माहौल है। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार एक अहम भूमिका निभाने वाले नेता रहे है।
महाराष्ट्र की राजनीति में साल 2019 का घटनाक्रम आज भी चर्चा का विषय बना रहता है। एनसीपी से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले अजित पवार का फैसला अचानक लिया गया एक बड़ा राजनीतिक कदम माना गया था। हालांकि यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल सकी।
सुप्रिया सुले को सौंपी गई मनाने की जिम्मेदारी
जब हालात बिगड़ने लगे, तो अजित पवार को वापस एनसीपी में लाने की जिम्मेदारी उनकी चचेरी बहन और सांसद सुप्रिया सुले को दी गई। शुरुआत में सुप्रिया सुले को खुद भी लग रहा था कि अजित पवार अपना फैसला बदलने के मूड में नहीं हैं।
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प्रतिभा पवार की भावनात्मक भूमिका
इसके बाद सुप्रिया सुले ने अपनी मां प्रतिभा पवार से बातचीत करवाई। अजित पवार हमेशा प्रतिभा पवार को मां की तरह मानते आए हैं। उनकी भावनात्मक अपील ने अजित पवार पर गहरा असर डाला और उन्होंने हालात पर दोबारा विचार किया।
शरद पवार के दबाव में बदला समीकरण
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार के दबाव में कई बागी विधायक भी पीछे हटने लगे थे। विधायकों का समर्थन कमजोर होते ही अजित पवार के पास भी सरकार में बने रहने का विकल्प नहीं बचा।
80 घंटे में गिर गई सरकार
अंततः शपथ लेने के महज 80 घंटे बाद ही महाराष्ट्र की वह सरकार गिर गई। अजित पवार ने बीजेपी से दूरी बनाते हुए दोबारा एनसीपी का दामन थाम लिया, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला।
किताब ‘35 डेज’ में दर्ज है पूरी कहानी
इस पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किताब ‘35 डेज’ में किया गया है। किताब के अनुसार, बीजेपी के साथ जाने के बाद अजित पवार को ‘घर तोड़ने वाला’ तक कहा गया था।
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अजित पवार का बयान
अजित पवार ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बीजेपी में शामिल होने का फैसला शरद पवार की जानकारी में था। उनके मुताबिक, बाद में हालात बदल गए और वादे पूरे नहीं हुए, जिसके चलते यह राजनीतिक मोड़ आया।
