शरद पवार, अजित पवार के साथ प्रफुल पटेल
Praful Patel Biography: भारतीय राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो पर्दे के पीछे रहकर भी सत्ता की दिशा तय करने की ताकत रखते हैं। प्रफुल पटेल एक ऐसा ही नाम है, जिन्हें दिल्ली की राजनीति का ‘अमर सिंह’ कहा जाता है। वर्तमान में राज्यसभा सांसद और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पटेल का सफर गोंदिया की गलियों से शुरू होकर लुटियंस दिल्ली के सबसे शक्तिशाली बंगलों तक पहुंचता है।
प्रफुल पटेल का जन्म 17 फरवरी 1957 को कोलकाता के एक संपन्न परिवार में हुआ था, लेकिन उनके परिवार की नींव संघर्षों से भरी थी। उनके पिता मनोहरभाई पटेल एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आए थे। उन्होंने रोजगार की तलाश में गुजरात छोड़ा और मध्य भारत चले आए। वहां उन्होंने ट्रक पर माल लादने-उतारने से लेकर घर-घर सामान बेचने तक का काम किया। बाद में, उन्होंने गोंदिया में बीड़ी का व्यवसाय शुरू किया, जिसने ‘सीजय ग्रुप’ (Ceejay Group) के रूप में एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया। यह समूह आज तंबाकू, फार्मास्युटिकल्स, रियल एस्टेट और पैकेजिंग जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है।
महज 13 वर्ष की आयु में प्रफुल के सिर से पिता का साया उठ गया, जिसके कारण उन पर बहुत कम उम्र में ही पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही व्यवसाय संभाला और आगे चलकर इस समूह का नेतृत्व किया। इसके साथ ही उनका परिवार गोंदिया और गुजरात में कई शैक्षणिक संस्थाएं भी चलाता है।
प्रफुल पटेल को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता महाराष्ट्र कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। प्रफुल ने महज 28 साल की उम्र में गोंदिया नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। 33 वर्ष की आयु में वे पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। उनका संसदीय करियर बेहद शानदार रहा है; वे 4 बार लोकसभा सांसद और 6 बार राज्यसभा सांसद रहे हैं।
राजनीति के अलावा, खेल जगत में भी उनका बड़ा प्रभाव रहा है। वे ‘ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन’ के अध्यक्ष और एशियाई फुटबॉल महासंघ की कार्यकारी समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषक प्रफुल पटेल की तुलना अक्सर समाजवादी पार्टी के दिवंगत नेता अमर सिंह से करते हैं। जिस तरह मुलायम सिंह यादव के लिए अमर सिंह का महत्व था, वैसा ही महत्व शरद पवार के लिए वर्षों तक प्रफुल पटेल का रहा। पटेल का कौशल केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगपतियों, व्यापारियों और सत्ता के विभिन्न केंद्रों में उनका जबरदस्त नेटवर्क है।
शरद पवार, अजित पवार के साथ प्रफुल पटेल
वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, दिल्ली में लुटियंस की ‘क्रीम’ (प्रभावशाली लोग) उनके बंगले पर होने वाली वार्षिक गेट-टुगेदर में हाजिर रहती है। शरद पवार ने उनके इसी नेटवर्किंग कौशल का बखूबी इस्तेमाल किया, जिससे वे दिल्ली में पवार के ‘दाहिने हाथ’ बन गए।
प्रफुल पटेल का करियर केवल उपलब्धियों तक ही सीमित नहीं रहा, उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे। यूपीए शासन के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्री रहते हुए उन पर एयर इंडिया को दिवालियापन की कगार पर धकेलने और बोइंग विमानों की खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगे। इसके अलावा, ईडी (ED) ने वर्ली स्थित एक टावर के मामले में इकबाल मिर्ची के साथ कथित संबंधों को लेकर उनकी जांच की थी।
विश्लेषकों का मानना है कि इन भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच एजेंसियों के दबाव के कारण ही प्रफुल पटेल ने अपना राजनीतिक रास्ता बदला। जब राष्ट्रवादी कांग्रेस में फूट पड़ी, तो वे शरद पवार का साथ छोड़कर अजित पवार के साथ चले गए। आश्चर्यजनक रूप से, भाजपा जिसने कभी उन पर तीखे आरोप लगाए थे, उन्हें अपने पाले में शामिल करने के बाद उन मामलों पर मौन नजर आती है।
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अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में प्रफुल पटेल की अहमियत उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीधे संवाद की क्षमता के कारण है। वे एक ऐसे नेता हैं जो संकट के समय सीधे शीर्ष नेतृत्व से बात कर सकते हैं।
अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के साथ प्रफुल पटेल
अजित पवार के निधन के बाद भी प्रफुल पटेल ने पार्टी की कमान मजबूती से संभाली। पटेल को का अब एनीसीपी का सबसे ताकतवर नेता माना जा रहा है। जब पार्टी अध्यक्ष का पद खाली होता है, तो कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सारी शक्तियां उनके पास आ जाती हैं। वर्तमान में, वे अजित पवार गुट के सबसे प्रभावशाली नीति-निर्धारक हैं, जो भाजपा के साथ संबंधों और पार्टी के कड़े फैसलों के पीछे की मुख्य कड़ी माने जाते हैं।