मानसून सत्र से पहले विपक्षी एकता तार-तार! परिसीमन बिल पर INDIA गठबंधन में रार, क्या अकेले पड़ जाएगी कांग्रेस?
INDIA Alliance Rift On Delimitation Bill: संसद के मानसून सत्र से पहले INDIA गठबंधन बिखरता दिख रहा है। सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन के ऐलान के बाद समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
- Written By: आकाश मसने
परिसीमन बिल पर INDIA गठबंधन में रार (डिजाइन फोटो)
Parliament Monsoon Session Delimitation Bill: संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी खेमे INDIA गठबंधन में एक बार फिर भारी खींचतान और बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा आगामी सत्र में पेश किए जाने वाले संभावित परिसीमन बिल को लेकर विपक्षी दलों के सुर आपस में ही टकराने लगे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले के एक बयान ने गठबंधन के भीतर मतभेद की आग में घी डालने का काम किया है, जिस पर शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता संजय राउत ने कड़ा पलटवार किया है।
सुप्रिया सुले के समर्थन से गर्माई सियासत
पूरे विवाद की शुरुआत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने लोकसभा सीटों के पुनर्गठन को लेकर बड़ा बयान दिया था। सुले ने कहा था कि यदि परिसीमन प्रक्रिया के तहत देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है, तो इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने खुलकर ऐलान किया कि यदि मोदी सरकार इस तरह का कोई ड्राफ्ट या संशोधन संसद में लाती है, तो उनकी पार्टी इसका पूरा समर्थन करेगी।
कांग्रेस और डीएमके भी देगी समर्थन?
इतना ही नहीं सुप्रिया सुले ने तो यहां तक कह दिया कि इस चर्चा में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एमके स्टालिन की डीएमके ने भी सकारात्मक रुख अपनाया था। उन्होंने कहा कि अगर सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में यह बिल पेश किया जाता है, तो पार्टी इसका समर्थन करेगी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुप्रिया सुले (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
संजय राउत बोले- कोई एक पार्टी अकेले फैसला नहीं ले सकती
सुप्रिया सुले के इस एकतरफा समर्थन वाले रुख से INDIA गठबंधन के बाकी घटक दल नाराज बताए जा रहे हैं। नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बिना नाम लिए सुप्रिया सुले और NCP (SP) को खरी-खोटी सुनाई।
राउत ने दोटूक लहजे में कहा कि परिसीमन जैसे गंभीर और राष्ट्रीय मुद्दे पर ‘INDIA’ गठबंधन का रुख क्या होगा, इसका फैसला कोई भी एक दल अकेले नहीं ले सकता। न शिवसेना (UBT), न NCP (SP), न कांग्रेस और न ही कोई अन्य सहयोगी पार्टी अपने स्तर पर फैसला थोप सकती है। अगर सरकार 50% सीटें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव लाती है, तो पहले गठबंधन के सभी दलों में चर्चा होगी, उसके बाद ही संयुक्त रुख तय किया जाएगा।
नागपुर, महाराष्ट्र: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले के बयान ‘अगर परिसीमन के दौरान सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50% की बढ़ोतरी होती है तो कोई आपत्ति नहीं होगी’ पर कहा, “अगर सीटें 50% बढ़ती है और सरकार इस संबंध में कोई संशोधन सामने लेकर… pic.twitter.com/IEt7FNYaO0 — IANS Hindi (@IANSKhabar) July 16, 2026
परिसीमन बिल पर क्या है कांग्रेस का रुख?
इधर कांग्रेस लगातार परिसीमन बिल का विरोध कर रही है। पिछली बार भी मोदी सरकार द्वारा सदन लाए गए इस बिल को विपक्षी एकता के दम पर पास नहीं होने दिया गया था। लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट रखा है, लेकिन इंडिया गठबंधन की बाकी पार्टियां अधर में लटकी हुई है।
स्टालिन की डीएमके का नरम रुख
सुप्रिया सुले ने जिस डीएमके की बात की वह भी पहले बिल के विरोध में थी, लेकिन तमिलनाडु चुनाव के बाद बदले सियासी समीकरणों से डीएमके का रुख नरम पड़ता दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु विधासभा चुनाव में विजय की TVK से मात और कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद एमके स्टालिन का मोदी सरकार के पाले में आने की अटकलें तेज हो गई है।
पीएम मोदी के साथ एमके स्टालिन (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
संसद में मोदी सरकार की राह हुई आसान?
अभी लोकसभा में BJP के नेतृत्व वाले NDA के पास 293 सीटें हैं। इसमें TMC के 20 बागी सांसदों और शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों को जोड़ने पर यह संख्या 319 हो जाती है। अगर शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों को भी इसमें शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 327 तक पहुंच जाता है। इसके अलावा, अगर अप्रैल में सरकार के समर्थन में वोट करने वाले 5 और लोकसभा सांसदों को भी इसमें जोड़ा जाए, तो यह संख्या 332 हो जाती है।
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लोकसभा में कुल 543 सांसद हैं, इसलिए दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सीटों की जरूरत होगी। ऐसे में मोदी सरकार को 28 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। इस समीकरण को देखें तो DMK के बिना दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करना आसान नहीं होगा। DMK के 22 लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में उनका समर्थन चाहे सीधा हो या परोक्ष मिलने पर सरकार आसानी से महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पास करा सकेगी।
