

Maratha Reservation Slogan During Speech: महाराष्ट्र के परभणी शहर में आयोजित किसान और युवा संवाद रैली में उस समय भारी हंगामा और तनाव का माहौल बन गया, जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भाषण देने के लिए मंच पर खड़े हुए। कार्यक्रम शुरू होते ही मराठा आरक्षण समर्थकों ने अचानक 'एक मराठा लाख मराठा' के जोरदार नारे लगाने शुरू कर दिए।
दरअसल, मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने इस कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की थी, जिसके चलते सभा स्थल पर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन इस बेहद गरमागरम माहौल के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जिस संयम और समझदारी का परिचय दिया, उसने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींच लिया।
यह हंगामा सिर्फ एकनाथ शिंदे के खड़े होने पर ही नहीं हुआ, बल्कि इससे पहले जब परभणी के सांसद संजय जाधव मंच पर भाषण दे रहे थे, तब भी सभा में मौजूद कुछ युवाओं ने 'एक मराठा, लाख मराठा' की नारेबाजी शुरू कर दी थी। इस नारेबाजी की वजह से कार्यक्रम में कुछ समय के लिए असमंजस और अराजकता की स्थिति पैदा हो गई थी।
स्थिति बिगड़ने से पहले ही मुस्तैद पुलिस ने तुरंत दखल दिया और नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों को सभास्थल से थोड़ा बाजू में कर दिया, जिससे मामला कुछ देर के लिए शांत हुआ।
जैसे ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मंच पर भाषण देने के लिए खड़े हुए, विरोध और नारेबाजी का दौर फिर से शुरू हो गया। लेकिन शिंदे ने अपना आपा खोने के बजाय बेहद शांत और संयमित रुख अपनाया। उन्होंने मंच से पुलिस और आयोजकों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा, नारे लगाने वाले ये लोग हमारे अपने ही हैं।
पुलिस को हमारे इन लोगों को किनारे नहीं हटाना चाहिए, बल्कि उन्हें मंच पर बुलाना चाहिए या सम्मानपूर्वक बाजू में खड़े रहने देना चाहिए। शिंदे के इस संवेदनशील व्यवहार ने वहां उपस्थित जनता को शांत किया और पुलिस की सतर्कता के कारण माहौल तुरंत नियंत्रण में आ गया। इसके बाद पूरा कार्यक्रम बिना किसी बड़ी बाधा के बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
हंगामे के शांत होने के बाद एकनाथ शिंदे ने अपना भाषण आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के समय में जिस तरह विशाल और भव्य सभाएं हुआ करती थीं, परभणी की यह सभा बिल्कुल वैसी ही विराट दिख रही है और वे बालासाहेब के विचारों वाली असली शिवसेना को ही आगे बढ़ा रहे हैं।
अपने भाषण में भावुक होते हुए उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए रक्षाबंधन त्योहार का जिक्र किया। उन्होंने कहा, पिछले दिनों रक्षाबंधन के अवसर पर हजारों लाडकी बहनें मुझसे मिलने आईं और आज भी कई बहनों ने मुझे राखी बांधी है। मैं नेता प्रतिपक्ष रहा हूं, मुख्यमंत्री रहा हूं और अब उपमुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहा हूं, लेकिन महाराष्ट्र में जो पहचान मुझे 'लाडकी बहन के भाई' के रूप में मिली है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पदवी और पहचान है।
एकनाथ शिंदे ने अपनी सरकार के कार्यों को गिनाते हुए कहा कि जब वे मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे थे, तब उनकी सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य के किसानों को भी सालाना 6000 रुपये देने का ऐतिहासिक फैसला लिया था।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि जब भी किसान संकट में होगा, यह सरकार हमेशा उनके पीछे खंभे की तरह खड़ी रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र सरकार की तिजोरी पर पहला और असली अधिकार राज्य के किसानों, नौजवानों और लाडकी बहनों का ही है।
इस प्रकार, कड़े सुरक्षा इंतजामों, पुलिस की मुस्तैदी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सूझबूझ भरे रवैये के कारण परभणी का यह मेळावा बेहद शांतिपूर्ण और सफल रहा।