20 हजार चालकों को एकनाथ शिंदे ने दिया प्रमाणपत्र, बोले- महाराष्ट्र कर्मभूमि है, मराठी से प्रेम करें

Marathi Training Certificates: मुंबई में 20 हजार हिंदी भाषी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी बातचीत का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिया गया। एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी थोपने की नहीं, प्रेम से अपनाने की भाषा है।
Eknath Shinde Gives Marathi Training Certificates
एकनाथ शिंदे ने ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी बातचीत का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिया(फोटो नवभारत)
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Eknath Shinde To Auto Taxi Drivers: महाराष्ट्र में मराठी सीखने वाले 20 हजार हिंदी भाषी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी में रोजमर्रा की बातचीत का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिया गया। बोरीवली के कोरा केंद्र मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी थोपने की नहीं, बल्कि प्रेम से अपनाने की भाषा है।

महाराष्ट्र ही कर्मभूमि

शिंदे ने कहा कि जन्मभूमि उत्तर प्रदेश, बिहार या कोई अन्य राज्य हो सकती है, लेकिन महाराष्ट्र कर्मभूमि है। इसलिए महाराष्ट्र की मराठी भाषा से प्रेम करना चाहिए। मराठी लोगों को जोड़ने वाली भाषा है। यात्रियों और चालकों के बीच मराठी में बातचीत बढ़ने से भाषा का प्रसार भी होगा और चालकों का कारोबार भी बढ़ेगा।

1.60 लाख लोगों ने सीखी मराठी

शिंदे ने बताया कि महाराष्ट्र में पहले चरण में करीब 1 लाख 60 हजार लोगों ने मराठी सीखी है। उन्होंने अन्य लोगों से भी मराठी सीखने और इसके प्रचार-प्रसार में योगदान देने की अपील की।

उन्होंने ईमानदारी से काम करने वाले ऑटो-टैक्सी चालकों की भी सराहना की। यात्रियों का पैसा या कीमती सामान मिलने पर उसे पुलिस के हवाले करने वाले चालकों को उन्होंने समाज के लिए आदर्श बताया। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक, विधायक प्रकाश सुर्वे सहित आदि मौजूद थे।

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कैबिनेट के 'रूल ऑफ बिजनेस' और वीटो का इस्तेमाल

महाराष्ट्र कैबिनेट के नए 'रूल ऑफ बिजनेस' के तहत मुख्यमंत्री को जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए फैसले की समीक्षा करने, उसे बदलने या आवश्यकता पड़ने पर खारिज करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के एक फैसले को पलट दिया। मुख्यमंत्री ने अपने विशेष अधिकार का उपयोग कर संबंधित फैसले में बदलाव करते हुए उसकी मियाद एक वर्ष के लिए बढ़ा दी।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के फैसलों पर हस्तक्षेप करने और अंतिम निर्णय लेने की महत्वपूर्ण शक्ति है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था जनहित और प्रशासनिक समन्वय को ध्यान में रखकर लागू की गई है।

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