

Vasai Virar TB Cases Rise: एक तरफ जहां केंद्र सरकार 'टीबी मुक्त भारत' का संकल्प दोहरा रही है, वहीं वसई-विरार शहर में क्षय रोग (टीबी) ने विकराल रूप धारण कर लिया है, 'टीबी मुक्त भारत' के सरकारी नारों के बीच जमीनी हकीकत डराने वाली है।
Vasai Virar शहर महानगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महज सवा साल में शहर में 6,735 नए टीबी मरीज सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय मौतों का आंकड़ा है। इस जानलेवा बीमारी ने अब तक 160 लोगों की जान ले ली हैं।
शहर के तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल और घनी आबादी इस बीमारी के लिए खाद-पानी का काम कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नालासोपारा, वसई पूर्व और पेल्हार जैसे इलाकों में संक्रमण की रफ्तार सबसे ज्यादा है।
इन क्षेत्रों में घरों की सघनता और वेंटिलेशन की कमी के कारण एक मरीज से दूसरे में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। आंकड़ों की जुबानी, खतरे की कहानी महापालिका के 'राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम' के तहत जारी रिपोर्ट शहर की बिगड़ती सेहत को बयां कर रही है।
राहत की बात बस इतनी है कि जांच में तेजी आने से करीब 50 प्रतिशत मरीज इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ भी हुए हैं। बढ़ते कहर को देखते हुए मनपा प्रशासन ने अब कमर कस ली है। औद्योगिक क्षेत्रों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले कामगारों के लिए पोर्टेबल एक्स-रे मशीन' का इस्तेमाल शुरू किया गया है। अब संदिग्धों को अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि मोबाइल वैन और पोर्टेबल मशीनों के जरिए 'डोर-टू-डोर' स्क्रीनिंग की जा रही है।
टीबी से डरने की नहीं, बल्कि समय पर इलाज की जरूरत है, यदि किसी को 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी, लगातार बुखार या वजन कम होने की शिकायत है, तो उसे तुरंत सरकारी केंद्र पर जांच करानी चाहिए। इलाज अधूरा छोड़ना और भी घातक हो सकता है। - डॉ। भक्ति चौधरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
वसई-विरार में बढ़ते टीबी के मामले बताते हैं कि केवल दवाएं बांटने से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को इन इलाकों में साफ-सफाई और 'सोशल हिस्टेंसिंग' (स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक हवा और रोशनी) पर भी ध्यान देना होगा, नागरिकों की जागरूकता ही इस जंग में सबसे बड़ा हथियार है।
राहुल सिंह जागरूक नागरिक
वसई-विरार से नवभारत लाइव के लिए मंगेश निषाद की रिपोर्ट