दहशत के साए में जी रहे वसई-विरार वासी, डेढ़ साल में सर्पदंश के 571 मामले, 3 महिलाओं की मौत से हडकंप

Vasai Virar Snakebite: वसई-विरार क्षेत्र में डेढ़ साल में सर्पदंश के 571 मामले सामने आए हैं। तीन महिलाओं की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में एंटी-वेनम और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई हैं।
Snakebite incidents create panic in Vasai-Virar: 571 cases registered in 1.5 years, 3
वसई विरार सर्पदंश घटनाएं, प्रतीकात्मक तस्वीरफोटो सोर्स-AI
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Highlights

  • वसई-विरार में डेढ़ साल में सर्पदंश के 571 मामले दर्ज, 3 महिलाओं की मौत।

  • कुल मामलों में 366 शहरी और 205 ग्रामीण क्षेत्रों के हैं।

  • रसोई, घरों और खेतों में सांपों के पहुंचने से बढ़ी चिंता।

  • सांप काटने पर घरेलू उपायों से बचें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।

Vasai Virar Snakebite Incidents: वसई-विरार क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से सितंबर 2026 तक करीब डेढ़ साल में सांप काटने के 571 मामले दर्ज किए गए।

इनमें 366 मामले शहरी क्षेत्रों और 205 मामले ग्रामीण इलाकों के हैं। पिछले दो महीनों में तीन महिलाओं की मौत के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।

रसोई से खेत तक सांपों का खतरा

वसई-विरार क्षेत्र में हाल के दिनों में सर्पदंश की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। 7 अक्टूबर को विरार के आगाशी परिसर स्थित सोमाडी गांव में 51 वर्षीय शैला उर्फ चार्लेटी घोन्सल्विस को रसोई में सांप ने डस लिया। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

इससे पहले 6 सितंबर को वसई पूर्व के राजावली-काजूपाड़ा इलाके में 27 वर्षीय ललिता साटे को सोते समय सांप ने काट लिया था। वहीं, 10 अगस्त को विरार पूर्व के उसगांव-भाटाणे में खेत में काम कर रहीं 53 वर्षीय सुमन मारुति कोम की सर्पदंश के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई।

गर्मी और जंगलों की कटाई से बढ़ी परेशानी

सर्पमित्र हेमंत पवार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में गर्मी बढ़ने, जंगलों के नष्ट होने और पानी की कमी के कारण सांप रिहायशी इलाकों की ओर आ रहे हैं। उनके अनुसार, बंगलों, इमारतों, दोपहिया वाहनों और कबाड़ रखने वाले कमरों से भी सांपों को रेस्क्यू किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और निर्माण कार्यों के कारण सांपों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं। भोजन और पानी की तलाश में नाग, घोणस (वाइपर), मन्यार और फुरसे जैसी जहरीली प्रजातियां घरों और बस्तियों तक पहुंच सकती हैं।

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स्वास्थ्य विभाग ने की इलाज की व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग की मुख्य अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने पर इलाज में देरी न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। उनके मुताबिक, महानगरपालिका के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक एंटीवेनम और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

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सर्पदंश होने पर तुरंत लें चिकित्सा सहायता

सांप काटने पर मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। घाव को काटने, जहर चूसने या कसकर पट्टी बांधने जैसे घरेलू उपायों से बचना चाहिए। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

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