

Nalasopara Renaming Shurparaka Proposal Approval: मुंबई महानगर क्षेत्र एमएमआर के ऐतिहासिक शहर नालासोपारा को उसकी पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान वापस दिलाने की बड़ी कवायद शुरू हो गई है। वसई-विरार शहर महानगर पालिका की स्थायी समिति ने नालासोपारा का नाम बदलकर इसका प्राचीन नाम शूर्पारक रखने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है।
इस औपचारिक प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति और राजपत्र अधिसूचना के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास भेजने की प्रशासनिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।
पुराणों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा है इतिहास : ऐतिहासिक ग्रंथों और शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान नालासोपारा प्राचीन भारत का एक अत्यंत समृद्ध बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र हुआ करता था।
स्कंद पुराण में इस स्थान का उल्लेख 'शूर्पारक' के नाम से मिलता है, जिसे प्राकृत भाषा में 'सुप्पारक' कहा जाता था। ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे स्टेशन के निर्माण के समय स्थानीय गांवों 'नाला' और 'सोपारा' को मिलाकर इसका नाम 'नालासोपारा' कर दिया गया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक 'सोपारा' शब्द मूल रूप से 'शूर्पास्क' का ही अपभ्रंश है। उल्लेखनीय है कि देश के नए संसद भवन में प्रदर्शित ऐतिहासिक 'भारतवर्ष' के मानचित्र में भी शूर्पारक को प्रमुखता से दर्शाया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पालिका के इस कदम का स्वागत करते हुए अभियान को और व्यापक बनाने का आह्वान किया है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता मनोज पाटिल ने राज्य सरकार से केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की है। प्रशासनिक मंजूरी मिलते ही इस ऐतिहासिक शहर की आधिकारिक कागजों में 'शूर्पारक' के रूप में वापसी हो जाएगी, जिससे क्षेत्र के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वसई-विरार की महापौर अजीव पाटिल ने कहा कि शूर्पारक क्षेत्र समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। उनके अनुसार, नाम परिवर्तन से पूर्वजों के योगदान को सम्मान मिलने के साथ नई पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गर्व की भावना मजबूत होगी।
प्रशासनिक स्तर पर अंतिम मंजूरी और राजपत्र अधिसूचना जारी होने के बाद ही नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से लागू होगा। स्थानीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि प्राचीन नाम की वापसी से क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ विरासत और पर्यटन विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।