Nagpur NEET Exam Centre Facilities: परीक्षा केंद्रों की हालत पर अदालत का स्वतः संज्ञान, लापरवाही पर नोटिस जारी

Nagpur NEET Exam Arrangement: नागपुर नीट परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। वेंटिलेशन, पानी और बिजली की कमी को लेकर नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
Nagpur NEET Exam Centre Facilities: Court Takes Suo Motu Cognizance of the Condition of Exam Centres; Issues Notices Over Negligence
नागपुर नीट परीक्षा केंद्र,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur NEET Exam Hall Drinking Water Issue: नागपुर नीट परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबर पर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया जिसके बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने पहले ही सख्त निर्देश दिए थे कि वे इन परीक्षा केंद्रों पर उचित वेंटिलेशन, एयर कूलर, पंखे, निर्वाध बिजली और पीने के सुरक्षित पानी की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित करें। अदालत द्वारा नियुक्त अदालत मित्र आस्था शर्मा ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि सिर्फ नीट ही नहीं बल्कि अन्य सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को प्रवेश परीक्षाओं के केंद्रों का भी यही हाल है।

मप्र HC के पिछले फैसले का किया जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत में 14 जुलाई 2025 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (इंदौर बैच। द्वारा दिए गए एक आदेश का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उस फैसले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और स्थानीय प्रशासन को परीक्षाओं के दौरान निर्वाध बिजली आपूर्ति (नियमित या वैकल्पिक माध्यम से) और कूलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में 10 जनवरी 2026 को NTA द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए थे।

अनुच्छेद 21 और छात्रों के स्वास्थ्य का हवाला

हाई कोर्ट का मानना था कि चिलचिलाती गर्मी में उचित वेंटिलेशन, ठंडी हवा और पीने के पानी के अभाव में छात्रों को डिहाइड्रेशन, लू और गर्मी से होने वाली अन्य बीमारियों का भारी जोखिम है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर छात्रों के स्वास्थ्य और भलाई से जुड़ा हुआ है।

अदालत ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ और बिना स्वास्थ्य को खतरे में डाले जीने का अधिकार है। ऐसे जोखिम भरे माहौल में परीक्षा आयोजित करना इन संवैधानिक अधिकारों के असंगत होगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसी असुविधाओं से छात्रों का प्रदर्शन सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है जो सालों से दिन-रात एक करके अपने करिअर का सपना देख रहे हैं।

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